बड़ी ख़बर: किसानों से बातचीत के लिए सरकार हर संभव संशोधन करने के लिए तैयार- राजनाथ सिंह

जयपुर: दिल्ली के किसान आंदोलन (Farmers Protests) को आज 1 महीने से भी ज्यादा का वक्त पूरा हो चुका है. किसानों के विभिन्न संगठनों की तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग इस आन्दोलन के ज़रिये की जा रही है. किसानों के लिए सरकार द्वारा बनाए हुए इन तीन कानूनों के मुद्दे को लेकर अभी तक सरकार और किसान संगठनों के बीच 6 बैठक हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक नतीजा सिर्फ ढाक के तीन पात ही रहा.

आपको बता दें कि, इस बड़े कृषि आंदोलन में देशभर के कई राज्यों के किसान अपने खाने पीने के सामान के साथ, यहां दिल्ली में धरना देने के लिए आए हुए हैं. इन किसानों में मुख्य रूप से पंजाब-हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान के किसानों सहित देश के अन्य जगहों से भी कई किसान शामिल होने के लिए आए हैं.

Kisan Andolan par Sarkar Bat karne ke liye taiyar rajnath singh

क्या सरकार द्वारा बनाये गए ये तीनों कृषि कानून वापिस ले लिए जायेंगे?

किसान आंदोलन के जरिए, किसानों ने मांग की है कि,  मोदी सरकार द्वारा किसानों के लिए बनाए इन तीनों नए कृषी कानूनों को वापस ले और उन्हें इन तीनों कानूनों में किसी भी तरह का संशोधन करना कतई मंजूर नहीं है.

हालांकि इन किसानों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बार-बार बताया है कि यह तीनों कृषि कानून किसानों की भलाई के लिए हैं. यहां तक कि देश के गृहमंत्री अमित शाह भी कई बार किसानों से अपील कर चुके हैं कि इससे किसान को फायदा ही होगा और विपक्ष इन किसानों को कृषि कानून के नाम पर गुमराह कर रहा है.

इधर विपक्ष भी लगे हाथ इस मुद्दे को बनाए हुए है, लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से इन किसानों को मनाने कि जो कोशिश की गयीं है वह काफी नहीं हैं. इसी बीच राजनाथ सिंह जी का भी आज एक बड़ा बयान आया है.

सरकार कृषि कानून में संशोधन के लिए तैयार- केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह

देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के द्वारका में एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए देश के रक्षा मंत्री ‘राजनाथ सिंह’ ने कहा कि अगर किसान चाहे तो सरकार इन तीनों जिलों में संशोधन करने के लिए तैयार है. मैं खुद भी एक किसान का बेटा हूं और किसानों की भलाई चाहता हूं.

किसान भाई चाहें तो एक बार, भले ही 1 या 2 साल के लिए इन तीनों कृषि कानूनों को लागू करने दें, और एक प्रयोग के तौर पर इसको देखें. यदि देशभर के किसानों को ऐसा लगता है कि इन तीनों कृषि कानूनों से उनको किसी भी तरह का फायदा नहीं हो रहा, या इससे उनको किसी तरह का नुकसा’न पहुंचता है तो सरकार इसमें बातचीत के जरिए हर संभव कोशिश करेगी वह जो किसानों के हित में होंगे.

मैं इस सभा के जरिए, आंदोलन कर रहे किसानों से अपील करता हूं कि किसानों के संगठन सरकार से बातचीत करने के लिए आगे आयें. और सभी पहलुओं को देखते हुए ठंडे दिमाग से एक बार जरूर इसके बारे में सोचें. क्योंकि मुझे नहीं लगता कि किसानों के लिए बनाए गए इन तीनों कृषि कानूनों से किसान को किसी भी तरह का नुकसा’न होने की संभावना है.