भारत का पहला फाइटर जेट तेजस बनाने वाली सरकारी कंपनी HAL को लेकर मोदी सरकार ने लिया यह फैसला

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार निजीकरण और विनिवेश की योजनाओं पर काम कर रही हैं. पिछले कुछ सालों में सरकार ने कई सार्वजानिक संपति या तो निजी क्षेत्र को बेच दी हैं या लीज पर ले लिया हैं. इसके आलावा सरकार सार्वजिनक क्षेत्र की कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी भी कम करती जा रही हैं. इसी कड़ी में मोदी सरकार ने अब भारत का पहला स्वदेशी फाइटर जेट बनाने वाली सार्वजानिक क्षेत्र की कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने का फैसला लिया हैं.

बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL-Hindustan Aeronautics Limited) में हिस्सेदारी बेचने जा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार OFS के जरिए 10% तक हिस्सा बेचेगी.

Hindustan Aeronautics Limited

एचएएल यानी हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड में सरकार अपनी 10% हिस्सेदारी बेचने जा रही हैं. शेयर बाजार और आर्थिक मामलों पर नजर रखने वाली मीडिया चैनल CNBC आवाज़ को मिली खबर के अनुसार सरकार ओएफएस यानी ऑफर फॉर सेल के द्वारा 10% तक हिस्सा बेचेगी.

इसी क्रम में इसके ओएफएस के लिए फ्लोर प्राइस 1001 रुपये प्रति शेयर रखा गया हैं. माना जा रहा है कि नॉन रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए OFS गुरुवार को खुल सकता हैं.

आपको बता दें कि एचएएल एक नवरत्न कंपनी है. जून 2007 में एचएएल को नवरत्न कंपनी का दर्जा मिला था. उत्पादन के मूल्य को देखते हुए यह रक्षा क्षेत्र की सबसे बड़ी सरकारी कंपनी के रूप में जानी जाती है.

यह कंपनी कई तरह के उत्पाद बनाती है. साथ ही यह उत्पाद की डिजाइन, मरम्मत, मेंटेनेंस आदि का काम भी करती हैं. उसके उत्पादों की सूची में हेलीकॉप्टर्स, एवियॉनिक्स, वायुयान, एयरोस्पेस स्ट्रक्चर और एक्सेसरीज शामिल हैं. इस कंपनी की खास बात यह है कि यह काफी हद तक अपनी रिसर्च पर निर्भर हैं.

इसके अलावा एचएएल कई उत्पादों के उत्पादन के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और लाइसेंस एग्रीमेंट भी करता हैं. इसके कारोबार के विस्तार के लिए 13 कमर्शियल ज्वाइंट वेंचर्स भी मौजूद हैं. बता दें कि ओएफएस यानि ऑफर फॉर सेल के जरिए शेयर बाजार में लिस्‍टेड कंपनियों के प्रमोटर्स अपनी हिस्सेदारी को बेचते हैं.