अयोध्या के हनुमान गढ़ी पर हुई थी कब्जे की कोशिश, मुस्लिम राजा ने सुरक्षा के लिए भेजी थी फौज

अयोध्या में राम जन्म भूमि पर राम मंदिर के निर्माण की नींव रखी जा चुकी है. अयोध्या में राम जन्मभूमि के बाद दूसरा सबसे प्रमुख स्थान हनुमान गढ़ी है.यह एक बड़ा किला है जिसके टॉप पर हनुमान जी का मंदिर बना हुआ है. अयोध्या में रामलला के दर्शन करने के लिए आने वाले श्रद्धालु सबसे पहले हनुमान गढ़ी पहुंच कर हनुमान जी के दर्शन करते हैं और इसके बाद ही भगवान राम के दर्शन करने जाते हैं.

आज राम मंदिर के भूमिपूजन के लिए अयोध्या पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहले हनुमान गढ़ी में बजरंग बली के दर्शन करने पहुंचे थे इसके बाद ही उन्होंने रामलला के दर्शन किये.

हनुमान गढ़ी एक ऐसा स्थान है जिसके साथ सांप्रदायिक सौहार्द्र की बहुत बड़ी भावना जुड़ी हुई है. दरअसल 1774 में नवाब शुजाउद्दौला ने जागीर देकर इसका पुनरुद्धार कराया था. बताया जाता है कि कुछ जिहादी किस्म के मुसलमान 1856 में इस किले और मंदिर पर अपना कब्जा जमाना चाहते थे.

लेकिन इस समय वाजिद अली शाह की हुकूमत हुआ करती थी, उसी दौरान एक त्रिपक्षीय समझौता भी हुआ था. लेखक अमृत लाल नागर ने अपनी किताब में बताया है कि उन लोगों द्वारा इस समझौते को तोड़ दिया गया और मंदिर पर कब्जा करने का प्रयास किये गया.

जिसके बाद वाजिद अली शाह ने मंदिर की सुरक्षा के लिए अपनी सेना भेजी थीं. कब्जा करने की प्रयास कर रहे 300-400 मुस्लिम मा’रे गए. आपको बता दें कि हनुमान गढ़ी एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसमें हनुमान जी एक राजा के रूप में स्थापित हैं.

साधु मधुबन दास ने हनुमान गढ़ी के मंदिर का धार्मिक महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि यह गंगा जमुनी तहजीब और भाईचारे की मिसाल है. हनुमान जी महाराज के इस सिंहासन की रक्षा मुगल शासन और अंग्रेज शासन द्वारा भी की गई थी.

उन्होंने कहा कि माता जानकी हनुमान जी को अपने पुत्र रूप में स्वीकार कर चुकी थी और उन्होंने अपने पुत्र लव और कुश को राज्य न देकर ज्येष्ठ पुत्र को राज्य दिया. भगवान राम गु’प्तार घाट के गुप्त होने से पहले हनुमान जी महाराज को राजा बनाकर गए.

साभार- एनडीटीवी