आज गिर सकती है हरयाणा की खट्टर सरकार? किसान आंदोलन की वजह से हो रहा है ये सब कुछ

चंडीगढ़: देश में चल रहे किसान आन्दोलन की वजह से, हरियाणा सरकार की जड़ें हिलती हुई दिखाई दे रही हैं. हरयाणा में बीजेपी और जेजेपी सरकार के प्रति किसान आंदोलन की वजह से लोगों में जबरदस्त तरीके से नाराज़गी है. पिछले कुछ समय से जेजेपी प्रमुख दुष्यंत चौटाला पर आन्दोलनकारी, भाजपा सरकार से अपना समर्थन वापस लेने को कह रहे हैं.

हरयाणा में इस बीच, वहां की विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने आज सदन में हरयाणा की खट्टर सरकार के खिलाफ, अविश्वास प्रस्ताव भी लाने का मन बना लिया है. आज खट्टर साकार के लिए परीक्षा का दिन जैसा साबित होने जा रहा है. अगर सदन में बहुमत साबित न कर सके तो हो सकता कि आज हरियाणा में खट्टर सरकार गिर सकती है?

हरयाणा में सरकार इस तरह से गिर सकती है, जानिए

Haryana Me Sarkar Giri

फिलहाल, हरियाणा विधानसभा में वर्तमान में कुल मिलाकर 90 सीटें हैं. इधर एक बात और भी है कि वर्तमान में विधानसभा में सिर्फ 88 सदस्य ही हैं. लेकिन जिस गठबंधन को मिलाकर हरयाणा में सरकार बनी थी. इन लोगों के लिए बहुमत का आंकड़ा 45 ही है.

इधर बीजेपी पार्टी के पास के पास अपने कुल 40 विधायक हैं. उधर जेजेपी पार्टी के पास 10 और फिर कांग्रेस के 30 सदस्य हैं. आपको बता दें कि हरयाणा में बीजेपी ने जेजेपी और कुछ दूसरे निर्दलियों विधायकों का समर्थन लेकर ही यहाँ सरकार बनाई है.

इधर, सात निर्दलिय विधायकों में से पांच फिलहाल सरकार को समर्थन दे रहे हैं. इसके अलावा इनका एक सदस्य हरियाणा लोकहित पार्टी का भी मौजूद है, लेकिन यह भी फिलहाल सरकार को ही समर्थन दे रहा था. लेकिन आज विशवाश मत हासिल करते समय ये सब देखना होगा कि कौन कहाँ जायेगा.

देश में किसान आंदोलन के चलते, सबसे ज्यादा जेजेपी के दुष्यंत चौटाला पर वहां के प्रमुख जो किसान आन्दोलन में हैं ये लोग इन लोगों पर लगातार पीछे हैं कि जेजेपी खट्टर सरकार से अपना समर्थन वापस ले ले.

हालाँकि बीजेपी का इस तरह कहना है कि अगर ये लोग समर्थन वापिस ले भी लेते हैं तो भी हरयाणा में इनके गठबंधन की सरकार बनी रह सकती है.

इन लोगों ने गडित लगाकर ये दावा किया है कि उन लोगों के पास जेजेपी के अलावा पांच और निर्दलीय समर्थन भी है. हालांकि ये तो असल में तभी सही दिखेगा कि कौन खट्टर सरकार के साथ जायेगा और कौन नहीं. लोगों को अब इस अविश्वास प्रस्ताव के दौरान होने वाले वोटिंग का इंतज़ार है.

दिल्ली (नोएडा) के रहने वाले ज़ुबैर शैख़, पिछले 10 वर्षों से भारतीय राजनीती पर स्वतंत्र पत्रकार और लेखक के तौर पर कई न्यूज़ पोर्टल और दैनिक अख़बारों के लिए कार्य करते हैं।