हथिनी की मौत पर फैलाए गए झूठ, गोदी मीडिया ने बनाया इसे सांप्रदायिक, जांच में हुआ बड़ा खुलासा

हथिनी की मौत पर फैलाए गए झूठ, गोदी मीडिया ने बनाया इसे सांप्रदायिक, जांच में हुआ बड़ा खुलासा

जिस हथिनी की मुँह में पटाखा फूट’ने से मौ’त हुई है और जिस घटना पर सोशल मीडिया ने पूरे केरल को जाहिल, क्रू’र और ज़ालिम घोषित कर दिया है. प्रारम्भिक जाँच में पाया गया कि किसी ने अनन्नास में पटाखे भरकर हथिनी को नहीं दिए थे बल्कि केरल में लोग जंगली जानवरो से ख़ुद को बचाने के लिए अनन्नास और दूसरे फलो में पटाखे भरकर रख देते हैं आमतौर से वह जंगली सूअरों के झुंड से बचने के लिए ऐसा करते हैं.

यह बिलकुल वैसा ही है जैसे पश्चिम उत्तर प्रदेश में नील गाय और माहों से बचने के लिए किसान अपने खेतों में खंदक खोदते हैं और गाय-माहे उसमें गिर कर म’र जाते हैं या गिरने के बाद शिकार कर लिए जाते हैं. यह भी जाँच में पता चला है कि हथिनी मल्लपुरम ज़िले में नहीं पलक्कड ज़िले में पायी गयी थी.

फिर मल्लपुरम ज़िले की घटना क्यों प्रचारित की गई क्योंकि विशेष धर्म के लोगों की संख्या ज़िले में बहुत है. केरल में वामपंथियों की सरकार है और देश में केरल अकेला ऐसा राज्य है जिसने कोरोना संक’ट का सफल मुक़ाबला किया है.

मज़दूरों का मामला हो या केरल की आम जनता का वहाँ के क्वॉरंटीन सेंटर हो या वहाँ के अस्पताल की व्यवस्था, वहाँ की स्वास्थ्य मंत्री हो या वहाँ का प्रशासन, सब मामलों में केरल की तारीफ़ देश विदेश में हुई है और यही बात विशेष संगठन और विशेष दल को चुभती है.

एक फ़ॉरेस्ट ऑफ़िसर की एक आधे अधूरे सच के साथ मलयालम भाषा में लिखी गयी पोस्ट इतनी वाइरल हो गयी कि पूरा देश जागरूक हो गया. आपको याद नहीं अमित शाह ने कहा था कि हमारा आईटी सेल किसी भी सच्ची या झूठी ख़बर को पूरे देश में फेलाने की ताक़त रखता है.

ज़रा सोचिए तो जो लोग गर्भवती महिला के पेट से बच्चा निकालने वाले और बच्चें को त्रिशूल पर उठाने वाले बाबू बजरंगी को सम्मानित करते है और उसकी ज़मानत पर उसके समर्थन में हज़ारों की तादाद में जयघोष करते हैं, वो एक गर्भवती हथिनी की मौ’त पर सदमे में क्यों है? जो लोग एक गर्भवती छात्रा को जेल में डाले जाने का समर्थन करते हैं(सफुरा जरगर)

उस पर घिनोने लांछन लगाते हैं, जब एक महिला सैन्य अधिकारी ने कोख में ही मा’रने की बात करते है. आज सफुरा जरगर की तबियत बहुत खराब है. गर्भपात होने की आशंका है. लेकिन उस महिला पर कोई आवाज उठाने के लिए तैयार नहीं है. उन को गर्भवती हथिनी का सदमा क्यों हुआ होगा ?? क्यूंकि धर्मविशेष को जो जिम्मेदार बताना है.

घटना केरल की है इसलिए सुर्ख़ियो में हैं. मध्य प्रदेश, उत्तराखंड या हिमाचल प्रदेश की होती तो आपको आज भी यह नहीं पता चल पाता कि प्रकाश जावडेकर आपके पर्यावरण मंत्री हैं. वैसे हाल ही में हिमाचल प्रदेश में बंदरो को मा’रने पर सरकार ने इनाम की घोषणा की है, अगर सच में थोड़ी सी भी पशुओं के लिए दिल में दया है तो इसका विरोध भी कीजिए.

पूरे उत्तर प्रदेश में जगह जगह आवारा गाय सड़क पर लाखों की तादाद में घूम रही है और अनगिनत गाय रोज़ सड़क हादसे में मर भी रही है. थोड़ी दया दृष्टि इन गायों पर भी डाल लीजिए, गाय तो वैसे भी धर्म से जुड़ी हुई है.

लेखक- कमल नयन
(यह लेखक के निजी विचार हैं)