लॉकडाउन ने बदल दी जिंदगी, प्रसिद्ध हलवाई ठेला लगाने को मजबूर, सुनें दीपक और सादिक की दर्द भरी कहानी

कोरोना महामा'री में लॉकडाउन के कारण नौकरी गंवाने वाले युवा दर-दर भटकने को मजबूर, सुनें दीपक शर्मा और सादिक खान की दर्द भरी कहानी

दुनिया भर में कोरोना महामारी ने करोड़ों लोगों को प्रभावित किया है भारत में भी लाखों लोगों ने कोरोना महामा’री की वजह से जा’न गंवा दी लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें इस वायरस ने तो न छुआ लेकिन सरकार की लापरवाही उन्हें ठीक से जीने भी नहीं दे रही हैं। कोरोना महामा’री के बाद पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया था और विशेषज्ञ यहाँ तक कहते हैं कि भारत का लॉकडाउन सबसे सख्त लॉकडाउन था।

वही देश में लॉकडाउन के बाद की तस्वीरें बहुत भयानक थी जब बड़े शहरों से सैकड़ों की तादाद में बेसहार मजदूर अपने छोटे छोटे बच्चों को कंधे पर लाद कर सड़क के रास्ते अपने गांव की ओर लौटते दिखे। गांव की ओर जाते हुए सड़क पर इन मजदूरों को सिर्फ कोरोना महामा’री का ही डर नहीं था उनको एक और डर जो इनके जहन में बसा हुआ था वह था रोजगार का।

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कोरोना महामा’री से कितने ही लोगों ने अपने रोजगार से हाथ धो दिया ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसे ही 2 लोगों की कहानी जिनकी जिंदगी कोरोना महा’मा’री की वजह से बिल्कुल बदल गयी ।

मुजफ्फरनगर के रहने वाले, दीपक शर्मा

37 वर्षीय दीपक शर्मा मुजफ्फरनगर में दीपक हलवाई के नाम से प्रसिद्ध है। दीपक अपने स्वादिष्ट भोजन के लिए मुजफ्फरनगर में जाने जाते हैं दीपक ज्यादातर बड़े आयोजन में ही काम करते हैं। अब तक दीपक हजार लोगों के खाने जैसे 100 से ज्यादा कार्यक्रम करवा चुके हैं लेकिन अब दीपक की जिंदगी बिल्कुल बदल गई है।

दीपक कहते हैं कि कोरोना के बाद हुए लॉकडाउन ने उनकी जिंदगी को बदल कर रख दिया है। अब तो 100 लोगों के खाने के लिए भी किसी को रोजगार नहीं दे सकता। दीपक को लीवर की परेशानी है। अस्पताल में दीपक अपना सब कुछ गंवा बैठे हैं। अब उनके लिए शादियों में खाना बनाना तथा वहां भी काम ना मिलने पर चाट का ठेला लगाना ही कमाई का एकमात्र जरिया बचा है।

दीपक कहते हैं कि अब तो मांगने जैसी स्थिति हो गई है पर मांगे भी तो किससे क्योंकि सब की ही हालत बिगड़ी हुई है।

सादिक खान, मीरापुर

मीरापुर के रहने वाले 38 वर्षीय सादिक खान की जिंदगी भी कोरोना म’हामा’री के बाद लगे लॉकडाउन के बाद बेवस हो गई है, सादिक दिल्ली में एक मोबाइल कंपनी में काम करते थे परंतु लॉकडाउन के बाद उनकी नौकरी चली गई। सादिक बताते हैं कि नौकरी जाने के बाद बच्चों की पढ़ाई भी छूट गई है और पत्नी का भी इलाज नहीं करवा पा रहे हैं।

सादिक दिल्ली से आने के बाद अब परचून का सामान बेच रहे हैं। सादिक इन परेशानियों की वजह सरकार द्वारा लॉकडाउन के दौरान बरती गई लापरवाहियों को मानते हैं। वे कहते हैं कि सरकार ने बिना किसी पूर्व योजना के देश में लॉकडाउन कर दिया जिससे बहुत लोग एक ही झटके में बेरोजगार हो गए।

सादिक कहते हैं कि क्या अब मुझे पकौड़े बेचने चाहिए लेकिन अब पकौड़े बेचने का भी माहौल नहीं बचा है। अगर हम अपने अधिकारों की बात करते हैं तो उसे तुरंत मजहब से जोड़कर देखा जाता है। कि यह सरकार द्वारा किए गए कार्यों के खिलाफ हैं।