हिन्दुस्तान ज़िन्दाबाद था, ज़िन्दाबाद है और ज़िन्दाबाद रहेगा- Mohd Zahid

नागरिकता संसोधन ऐक्ट (CAA) पर हिन्दुस्तान ने मुसलमा’नों की इस शिकायत को दूर कर दिया कि उसके बहुसंख्यक मुसलमा’नों से संबन्धित मसलों पर उनका साथ नहीं देते, उनकी आवाज़ नहीं उठाता उनके लिए सड़क पर नहीं उतरता। नागरिकता संसोधन बिल में मुसलमा’न और इस्लाम शब्द हटाकर केन्द्र की सरकार और विशेषकर गृहमंत्री अमित शाह ने देश को यह स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया है कि संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बदलने का यह पहला प्रयास है।

और इसके साथ ही देश उबल पड़ा जिसमें देश के सभी वर्गों की भागीदारी थी, नेतृत्व था और इस मुसलमा’न और संविधान विरोधी कानून को हटाने का संकल्प था। महाराष्ट्र के पूना में करीब 5 लाख से अधिक लोग सड़कों पर इस कानून का विरोध करने उतर आए तो मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में 50 हज़ार से अधिक भी’ड़ उतर आई जिसमें फिल्म उद्योग के जाने माने चेहरे भी शामिल थे।

तब जबकि आमिर खान, शाहरुख खान, सलमान खान और सैफ अली खान जैसे सिल्वर स्क्रीन के फन्ने खाँ अपने कैरियर और फिल्मों के पिट जाने के डर से गूँगे बहरे बने बैठे रहे तब अपने कैरियर को दाँव लगाकर अभिनेत्री स्वरा भास्कर सड़क से सोशल मीडिया तक इस संविधान विरोधी बिल के खिलाफ अलख जगाती रहीं और जगा रही हैं।

फिल्म निर्माता निर्देशक अनुराग कश्यप अपने कैरियर से बेपरवाह देश के गृहमंत्री और प्रधानमंत्री की आँख में आँख डाल कर सवाल पूछने की हिम्मत कर रहे हैं तो फिल्म निर्माता निर्देशक अनुभव सिन्हा भाजपा की ट्रोल आर्मी का एक एक करके जवाब दे रहे हैं। अभिनेत्री नंदिता दास, फिल्म निर्माता अपर्णा सेन जैसी हस्तियाँ इस ऐक्ट को वापस लेने के लिए सड़कों पर उतर रहीं हैं।

पुना, महाराष्ट्र, आसाम, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड हैदराबाद, दिल्ली उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, पंजाब, तमिलनाडु हर जगह इस कानून का सभी वर्गों ने जहाँ नेतृत्व किया वहीं बिहार के सीमांचल में असदुद्दीन ओवैसी ने इस आंदोलन की अबतक की सबसे बड़ी सभा को संबोधित किया जिसमें हर वर्ग के लोग शामिल थे।

इसी का परिणाम है कि गृहमंत्री अमित शाह यह घोषणा कर रहे हैं कि नागरिकता संसोधन कानून पर वह एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे , जबकि हकीकत यह है कि वह कई किलोमीटर पीछे जाकर अब मिसकाल पर समर्थन की गुहार लगा रहे हैं। हास्यास्पद स्थीति है कि बन गये कानून पर देश से मिसकाल करके हैसटैग ट्रेन्ड कराकर समर्थन माँगा जा रहा है। ऐसा इस देश में 70 साल में पहले कभी नहीं हुआ।

सोशलमीडिया पर सुधीर चौधरी समेत तमाम भाजपा के शुभचिंतकों ने नागरिकता संसोधन बिल पर पोल कराया जिसमें उनको मुँह की खानी पड़ी तो यह देश के हर वर्ग के विरोध के कारण ही है। सरकार और संघ परिवार की मानसिकता समझिए, वह एक चाल चलती है और फिर अपने नेटवर्क के माध्यम से आकलन करती है कि समाज में इस कारण कितना विभाजन हुआ? कितना ध्रुविकरण हुआ ? और फिर वह आगे बढ़ती है, क्युँकि उसके निर्णयों से हर बार ध्रु’विक’रण होता ही है।

पर इस बार ऐसा नहीं हुआ, य’द्ध’पि सरकार ने इसमें हिन्दू-मुस्लि’म करने की बहुत कोशिश की, यद्धपि कि मुसलमा’नों में ही कुछ जज़बाती लोगों ने धार्मिक नारे लगाकर कुछ गलतियाँ भी कीं पर इसके बावजूद संघ का चलाया यह तीर उनको ही चुभ गया। मुसलमा’नों को एक बात समझ लेनी चाहिए कि राजनैतिक सभाओं या आंदोलनों में धार्मिक नारों से परहेज करना चाहिए , जज़्बात में आकर लगाए ऐसे नारों से बहुत से अन्य धर्म के न्यायप्रिय लोग ऐसे आंदोलन से अलग हो जाते हैं।

यह हिन्दुस्तान के मुसलमा’नों के साथ खड़े होने का परिणाम ही है कि देश की 15 राज्य सरकारों ने अपने यहाँ एनआरसी लागू नहीं करने की घोषणा कर दी जिनमे 2-3 तो भाजपा समर्थित सरकारें भी हैं। काँग्रेस और प्रियंका गाँधी का खुलकर इस ऐक्ट के विरोध में आना उस डर के ऊपर जीत का प्रमाण है जिस डर को अखिलेश यादव ने राहुल गाँधी के अंदर बिठा दिया था कि मुसलमा’न का नाम लोगे तो हिन्दू वोट नहीं मिलेगा।

उम्मीद है जल्दी ही अखिलेश यादव के अंदर से भी यह डर दूर होगा , क्युँकि अंततः हम सब एक हैं , और देश में यह जज़्बा पैदा किया है “जामिया की शेरनीयों ने, सलाम है आप सबको ।

शुक्रिया हिन्दुस्तान हमारा यकीं रखने के लिए।

इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस लेख को Mohd Zahid के वॉल से लिया गया है.