भारत में कोरोना के नाम पर मुसलमानों को ज़िम्मेदार बताने पर भड़का अमेरिका कहा- देखें क्या कहा

नई दिल्लीः दुनिया भर में कोरोना कहर बरपा रहा कोरोना की चपेट में लाखों की संख्या में लोग आ गए हैं। जबकि इस म’हामा’री से म’रने वालों की संख्या भी हजारों में पहुंच गई है। भारत में भी इस म’हामा’री का खासा असर देखने को मिल रहा है, लेकिन भारत में इस वायरस से लड़ाई में अब धार्मिक मु’द्दा भी शामिल हो गया है। वजह दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में तब्लीगी जमात के लोगों के शामिल होना की।

आजतक की खबर के अनुसार तब्लीगी जमात के धार्मिक सम्मेलन का मामला सामने आने के बाद से पुरे देश का माहौल बदल गया है। इस मामले को एक अलग ही एंगल से देखा जा रहा है, इस मामले ने सोशल मीडिया में भी हैशटेग की बाढ़ ला दी है। तबलीगी जमात का मामला सामने आने के बाद से ट्विटर पर #CoronaJi had #NizamuddinMarkaz और #TablighiJamat जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

अमेरिका ने इन हैशटेग को लेकर कड़ी आ’प’त्ति जताई है और कहा है कि ऐसा लगता है कोरोना वायरस मुस्लि’म समुदाय के लोगों द्वारा ही फैलाया गया है. इस तरह का वाक्या काफी दुर्भा’ग्यपूर्ण है।

आपको बता दें अमेरिका के विशेष राजदूत सैमुअल ब्रा’उनबैक ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि, अमेरिकी प्रशासन ने पिछले कुछ दिनों में कई ऐसे मामले देखे हैं जिसमें इस बीमा’री के लिए भारत में अल्पसंख्य’क समुदाय को आरोपित किया जा रहा है।

भारत में अल्पसंख्यक समुदाय को लेकर ब्रा’उनबै’क ने कहा कि इस तरह के हैशटेग से ऐसा मालूम पड़ता है जैसे कि कोरोना वायरस मुस्लि’म समुदाय के लोगों द्वारा ही फैलाया गया हो. इस तरह का दु’ष्प्र’चार कई इलाकों में किया जा रहा है जो काफी दु’र्भाग्य’पू’र्ण है. सरकार को इस पर रोक लगानी चाहिए।

उन्होंने कहा, भारत सरकार इस मामले में स्पष्ट करे की जमात के लोग कोरोना के श्रोत नहीं हैं. हम जानते हैं कि यह एक म’हामा’री है जिससे पूरा विश्व जू’झ रहा है. इसका धा’र्मिक अ’ल्पसंख्य’कों से कोई लेना देना नहीं है।

गौरतलब है कि दिल्ली स्थित निजामुद्दीन मरकज में 1 से 15 मार्च के बीच तबलीगी जमात के लोग हिस्सा लेने पहुंचे थे। इसमें देश विदेश के लोग भी शामिल हुए थे। इस कार्यक्र’म में 2000 के करीब लोगों के हिस्सा लेने की बात कही गई है।

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