बेहद शर्मनाक: होटल में एक महिला के साथ मिले तीन जज, तीनों जजों पर हुई बड़ी कार्यवाही

ये तीनों जज काठमांडू के एक होटल में किसी महिला के साथ मिले थे

दिल्ली: हम लोग रोज़ाना हमारे आसपास या फिर देश भर में से किसी न किसी राज्य की ख़बरें आए दिन पढ़ते रहते हैं. इनमें से अधिकतर ख़बरें अपरा’ध से जुडी हुई होती हैं. छोटे मोटे चो’र उचक्के या आदतन अपरा’धी कोई जु’र्म करें तो उसमें कोई नयी बात नहीं, लेकिन तब क्या हो अगर किसी उच्च पद पर बैठे लोग ऐसा करने लग जाएँ.

कोर्ट में जज की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लोग उनके पास न्याय मांगने के लिए जाते हैं लेकिन जब दूसरों को न्याय देने वाले जज ही किसी ऐसे काम में मुब्तला हो जाएँ जो किसी अपरा’ध की श्रेणी में आता हो तो यह न्याय और इस उच्च पर की गरीमा को ठेस पहुंचाने का काम करता है.

teen jajon par hui karywahi

काठमांडू में महिला के साथ मिले थे तीनों जज

हाल ही में एक मामला सामने आया है जिसमें बिहार सरकार ने निचली अदालतों के तीन जजों को सेवा से बर्खास्त कर दिया और उसका कारण रहा कि यह तीनों ही जज काठमांडू में एक महिला के साथ मिले थे।

मीडिया में ख़बर के अनुसार, ये तीनों ही जज नेपाल के काठमांडू में सन 2013 में एक महिला के साथ मिले थे जिसके बाद उन पर अनुचित आचरण के आरोप लगे थे जिसकी वजह से बिहार सरकार ने तीनों जजों को सेवा से बर्खास्त करने का फैसला लिया।

बिहार सरकार ने यह निर्णय पटना हाईकोर्ट की अनुशंसा पर दिया । साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि न्यायाधीशों को सेवा से बर्खास्त किए जाने के बाद वे अब किसी भी तरह की सेवा के हकदार नहीं होंगे ना ही उन्हें कोई सुविधा प्रदान की जाएंगी।

सेवा से बर्खास्त किए गए तीनों जजों में समस्तीपुर के फैमिली कोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश हरी निवास गुप्ता तथा अररिया के चीफ ज्यूडिशल मजिस्ट्रेट कोमल राम और अररिया के तदर्थ तत्कालीन अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जितेंद्र नाथ सिंह शामिल थे।

बता दें कि जनवरी 2013 में निचली अदालत के तीन जज काठमांडू में महिला के साथ मिले थे जिसके बाद यह मामला पटना हाईकोर्ट की नजर में आया। पटना हाई कोर्ट ने मामले पर तुरंत संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए जिसमें यह तीनों ही जज दो’षी पाए गए। जांच में दोषी सिद्ध होने पर पटना हाईकोर्ट ने सरकार से मांग की कि तीनों ही जज को सेवा से बर्खास्त किया जाए।

कोर्ट के निर्णय को जजों ने दी थी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

बता दें कि पटना हाई कोर्ट के निर्णय के बाद सेवा से बर्खास्त किए गए तीनों जजों ने सुप्रीम कोर्ट में, कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। जिसमें तीनों जजों ने यह आरोप लगाया कि उन्हें बिना किसी जांच के सेवा से बर्खास्त किया गया है।

जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। लेकिन नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस फैसले को वापस ले लिया जिसके बाद पटना हाईकोर्ट ने पांच जजों की एक समिति बनाकर फिर से तीनों जजों को बर्खास्त करने का आदेश दिया जिसके बाद बिहार सरकार ने तीनों जजों को सेवा से बर्खास्त कर दिया।