भारत के साथ कैसा होगा बाइडेन प्रशासन का रुख़, क्या पूरा करेंगे 14 साल पुराना ख्वाब?

वाशिंगटन: दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका में राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए हुए बेहद कड़े मुकाबले में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जो बाइडेन की ऐतिहासिक जीत हो गई है, इस चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडेन ने रिपब्लिकन उम्मीदवार और वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हरा दिया, हलाकि राष्ट्रपति पद का यह मुकाबला विभाजनकारी और कड़वाहट भरा रहा है.

अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के बाद अब हर किसी के मन में यही सवाल उठ रहा हैं, की डोनाल्ड ट्रंप के बाद अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडेन की भारत को लेकर क्या नीति होगी? हलाकि भारतीय और अमेरिकी समुदाय से संपर्क के दौरान नए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने बराक ओबामा प्रशासन के तहत भारत और अमेरिका साझेदारी के लिए अपने लिए समर्थन मांगा था.

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बता दें जो बाइडेन भारत के बड़े समर्थक रहे हैं और भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते को लेकर बाइडेन ने हमेशा से भारत को ही अहमियत दी है, वही उपराष्ट्रपति के तौर पर भी उन्होंने भारत के पक्ष में कई फैसले लिए थे. जिनको लेकर अब उम्मीद की जा रही है भारत को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए जो बाइडेन का नाता सकारात्मक ही होगा.

पिछले दो दशकों से अमेरिका और भारत के रिश्ते काफी हद तक राजनीतिक रूप से सहज बने रहे, चाहे दिल्ली में या फिर वाशिंगटन में किसी की भी सत्ता रही हो, हालांकि, पिछले दिनों अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के साथ थोड़ी बहुत परेशानी व्यापार और प्रवासियों के मुद्दों को लेकर बनी थी.

गौरतलब है की, राष्ट्रपति बराक ओबामा 2010 में भारत दौरे पर आए थे तब अमेरिका के उपराष्ट्रपति जो बाइडेन थे जिन्होंने 2013 में चार दिवसीय भारत दौरे किया था और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी से मुलाकात की थी, इस दौरान उन्होंने मुंबई में कई बड़े कारोबारियों के साथ मिलकर एक बैठक की थी।

वही जब 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी सबसे पहले अमेरिका गए तो जो बाइडेन ने उनके लिए लंच का आयोजन किया था। 2016 में उन्होंने कांग्रेस के जॉइंट सेशन की अध्यक्षता की थी, जिसे पीएम मोदी ने संबोधित किया था।

आपको बता दें, अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अगस्त 2001 में तब के अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को एक लेटर लिखकर भारत पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की मांग की थी.

इसके अलावा 2008 में भी जो बाइडेन भारत-अमेरिका के बीच प’रमा’णु समझौते को अंजाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के एक्टिव रोल के हिमायती रहे थे।