एक आम घरेलू लड़की ‘बुशरा’ की IAS बनने तक के सफ़र की कहानी बड़ी दिलचस्प है, जानिए कैसे

बुशरा एक मध्यवर्गीय परिवार की लड़की हैं, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के बाद कैसे सोशल मीडिया के ज़रिये इन्होने अपने जीवन को एक नयी दिशा दी है जानिए उनकी इस इस सक्सेस स्टोरी में

सोशल मीडिया के जरिए कई लोगों ने किस तरह से अपनी जिंदगी बदल दी इस तरह की कई स्टोरी आपने इंटरनेट की अखबारों के माध्यम से जरूर पढ़ी होंगी. आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है आज हम बात कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश की एक साधारण मुस्लिम परिवार की लड़की, जिन्होंने यूपीएससी 2018 की परीक्षा में 277 वां रैंक प्राप्त किया.

इनका नाम है, बुशरा खान जो उत्तर प्रदेश के कन्नौज की रहने वाली हैं. उत्तर प्रदेश आमतौर पर पिछड़े मुसलमानों के तौर पर जाना जाता है, हालांकि यह पुरानी कहावत है अब समय धीरे-धीरे बदल रहा है. मुस्लिम समुदाय के लोग भी अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा देने की कोशिश कर रहे हैं, और इसी का नतीजा है कि पिछले कुछ वर्षों में देशभर में मुस्लिम समुदाय के लोगों की दशा पहले से कहीं ज्यादा बेहतर हुई है.

एक मध्यमवर्गीय लड़की से आईएएस बनने तक का सफ़र

Bushra Bano Success Story

बुशरा ने एक इंटरव्यू देते हुए, एनडीटीवी से बातचीत में बताया कि वह एक मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की हैं और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से उन्होंने पढ़ाई भी की है. जब बुशरा अलीगड़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पीएचडी मैनेजमेंट कर रही थीं, तब उनकी शादी मेरठ के असमर हुसैन से हो गई थी.

शादी के बाद सऊदी अरब जाना हुआ

असमर हुसैन भी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग के छात्र थे, और वे डिग्री लेकर सऊदी अरब की एक यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के तौर पर पढ़ाते थे. बुशरा की शादी के बाद ये लोग साल 2014 में सऊदी अरब चले गए थे और बुशरा उनके पति के साथ ही असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर काम करने लगी थीं.

बुशरा बताती हैं कि सऊदी अरब पहुंचने के बाद उनका जीवन अच्छे से बीत रहा था, लेकिन उनके दिलो-दिमाग में एक ही बात खटकती थी कि कहीं कुछ कमी है जो हमने पूरी नहीं की. एक दिन ये बात बुशरा ने अपने शहर को बताई तो वह उनके सपने को पूरा करने के लिए मान गए.

Success Story of Bushra

इस तरह से साल 2016 में यह दोनों सऊदी अरब से, अलीगढ़ वापस आ गए. फिर बुशरा यहां आकर यूपीएससी की तैयारी में जुट गयीं. हालांकि तब तक बुशरा के बच्चे हो चुके थे, उसके बावजूद भी वह रोजाना 10 या 15 घंटे तक पढ़ाई करती थीं, साथ ही साथ घर का काम संभालती और अपने बच्चे को भी.

सोशल मीडिया के ज़रिये भी सफ़लता मिली

आमतौर पर कुछ लोगों का यह मत होता है कि सोशल मीडिया से दूर रहकर ही, काम अच्छी तरह से हो सकता है. मगर बुशरा ने इस सोशल मीडिया को ही अपनी मेहनत करने का जरिया बनाया और सोशल मीडिया के जरिए ही उन्होंने कई लोगों से संपर्क करके ऑनलाइन पढ़ाई की और बुहत कुछ नया सीखा भी.

इसके बाद फिर साल 2017 में रिजल्ट में इनका नाम नहीं आया, इसके बाद फिर से वह दुगनी ताकत के साथ मेहनत करने के लिए लग गयीं. और फिर साल 2018 में रिजल्ट में बुशरा का नाम आ गया तो इनके घर वालों की खुशी का ठिकाना ना रहा और इस तरह से उन्होंने अपने आईएएस बनने के सपने को पूरा किया.

IAS Bushra

दोस्तों जहां अधिकतर लोग सोशल मीडिया पर अपना टाइम पास करके अपना कीमती समय नष्ट करते हैं, वहीं कुछ ऐसे होनहार लोग इसी के जरिए अपनी जिंदगी की दिशा बदलने का काम करने में लगे हुए हैं.

अब तक ऐसे हजारों उदाहरण आपको देखने को मिल जाएंगे, जिन्होंने सोशल मीडिया के जरिए रातों रात ख्याति प्राप्त कर ली, या फिर कुछ दिनों या कुछ महीनों की मेहनत के बाद अपने जीवन को सफलता की ऊंचाइयों तक ले गए.

उसमें से आप को चुनना है कि आप अपने लिए क्या और किस तरह से बेहतर काम कर सकते हैं. दोस्तों ये प्रेरणादाई पोस्ट अगर अच्छी लगे तो उसको अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें.

दिल्ली (नोएडा) के रहने वाले ज़ुबैर शैख़, पिछले 10 वर्षों से भारतीय राजनीती पर स्वतंत्र पत्रकार और लेखक के तौर पर कई न्यूज़ पोर्टल और दैनिक अख़बारों के लिए कार्य करते हैं।