अगर मध्य प्रदेश में भाजपा ने गिराई सरकार तो कमलनाथ खेलेंगे यह बड़ा दाँव….

मध्य प्रदेश में पिछले 1 महीने से सरकार बचाने और गिराने की कवायद हर स्तर पर जारी है. आज मामले की सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई है. कांग्रेस की ओर से भी एक याचिका दी गई है. जिस पर बहस के दौरान पार्टी के वकील ने कहा कि राज्यपाल कैसे कह सकते हैं कि सरकार के पास बहुमत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब 6 विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है तो विधानसभा स्पीकर ने क्या सभी 22 विधायकों पर अपने विवेक का इस्तेमाल किया है।

आपको बता दें कांग्रेस के 22 विधायकों ने बगावती तेवर दिखाते हुए बीजेपी के पाले में खड़े हो गए हैं लेकिन इसी बीच कमलनाथ सरकार की तरफ से जो बयान सामने आए हैं उसने देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है कमलनाथ सरकार ने कहा है कि उनके विधायकों को जबरदस्ती बेंगलुरु के एक होटल में शिफ्ट कराया गया है।

वही मीडिया से बात करते हुए कमलनाथ ने कहा की वह सभी विधायक कांग्रेस के पाले में आना चाहते हैं. लेकिन इसी बीच भाजपा ने नई चाल चल है भारतीय जनता पार्टी की तरफ से विश्वासमत साबित करने के लिए कहा गया है।

लेकिन कमलनाथ इस बात पर अड़े हुए हैं कि पहले भारतीय जनता पार्टी अविश्वास प्रस्ताव लाए उसी के बाद हम देंगे ऐसे ही हम बार-बार नहीं दे सकते वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के करीबी सूत्रों के मुताबिक खबर जो सामने आ रही है।

उसने प्रदेश की राजनीति में आने वाले वक्त की तरफ इशारा कर दिया है भारतीय जनता पार्टी कमलनाथ सरकार गिराने में कामयाब हो जाती है तो कमलनाथ सभी कांग्रेसी विधायक का इस्तीफा दिलाकर मध्यवर्ती चुनाव की तरफ मध्य प्रदेश को ले जाएंगे

यही कारण है कि मध्य प्रदेश को लेकर कमलनाथ ने आज कई बड़े फैसले किए हैं जिसमे कमलनाथ ने तीन और जिले बना दिए हैं. यही देखते हुए लग रहा है जिस तरह कमलनाथ तेजतर्रार तरीके से काम कर रहे हैं वह जनता को यह बताना चाहते हैं कि बीजेपी विकास कार्यों में बाधा डाल रही है।

बता दें विधानसभा अध्यक्ष द्वारा 16 मार्च को राज्यपाल के अभिभाषण के तुरंत बाद सदन की कार्यवाही 26 मार्च तक के लिये स्थगित किये जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा के नौ विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

भाजपा ने इस याचिका में अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और विधानसभा के प्रधान सचिव पर संविधान के सिद्धांतों का उल्लंघन करने और जानबूझ कर राज्यपाल के निर्देशों की अवहेलना करने का आरोप लगाया था।

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