जब सब भूल गए इन्हें तब इरफ़ान आए मदद के लिए आगे, क्रिकेटरों के ग्लब्स जूते सिलने वाले भास्कर को बिना बताए दी इतनी मदद

भारतीय क्रिकेटर इरफ़ान पठान पिछले लंबे समय से क्रिकेट की दुनिया से दूर है. लेकिन इसके बाद भी वह हमेशा सुर्ख़ियों में बने रहते है. सोशल मीडिया पर वह अक्सर ही चर्चा में आते रहते है. इरफ़ान पठान की आए दिन सोशल मीडिया पर तस्वीरें आती रहती है जिन में वह जरूरतमंद लोगों की मदद करते हुए नजर आते है. खास तौर पर ऐसे समय में जब देश मुश्किल हालतों का सामना कर रहा हो ऐसे में ना सिर्फ इरफ़ान बल्कि उनका पूरा परिवार हमेशा गरीब लोगों की मदद के लिए आए आता हैं.

इन दिनों भी सोशल मीडिया पर इरफ़ान पठान से जुडी एक खबर खूब वायरल हो रही है. इन दिनों भारत में कोरोनावायरस के चलते भूख’मरी चरम पर है. कोरोना वायरस के चलते लगाए गए लॉकडाउन के बाद लोगों की आर्थिक स्थिति बहुत ही बिगड़ गई है. ऐसे में छोटे-छोटे रोजमर्रा काम करने वालों लोगों के आगे दो समय के खाने की समस्या खड़ी हो गई हैं.

ऐसे ही लोगों की मदद के लिए इरफ़ान पठान एक बार फिर से आगे आए है. इसकी जानकारी ESPN क्रिक इंफो में काम करने वाले रौनक कपूर ने दी है. कपूर ने ट्वीट करके बताया है कि 6 जुन को मेरे साथियों सौरभ और शशांक की स्टोरी पढ़ने के बाद पूर्व भारतीय किक्रेटर इरफान पठान ने मुझे फोन किया.

दरअसल इरफ़ान पठान ने चेन्नई स्थित जुतो का काम करने वाले और भास्करण के बारे में किक्रेट मंथली में छपी स्टोरी को पढ़ा था. उन्होंने बताया इसके बाद इरफ़ान ने मुझ से भास्करण का कांटेक्ट नंबर मांगा. मैंने उन से जानना चाहा कि वह नंबर क्यों चाहते हैं.

लेकिन उन्होंने मुझे इस बार में नहीं बताया. फिर मैंने शशांक से उनका नंबर लेकर फौरन इरफ़ान को भेज दिया. जिसके बाद एक घंटे बाद इरफ़ान का मैसेज आया कि मैं भास्करण से बात करने की कोशिश कर रहा हूँ लेकिन बात नहीं हो पा रही है. हालांकि मैनै ये मैसेज अगले दिन पढ़ा पर मैं रीप्लाई भूल गया.

उन्होंने आगे बताया कि अब मुझे इंडियन एक्सप्रेस में वेकेट कृष्णा के आर्टिकल के जरिए जानकारी मिली कि इरफान पठान ने भास्करन को 25 हजार रुपए भेजे हैं. बता दें कि आईपीएल के दौरान भास्करण 25 हजार कम लेता था.

उन्होंने कहा कि इरफान ने ना सिर्फ उनकी मदद की बल्कि किसी को कानो कान खबर भी नहीं होने दी और ना ही कोई क्रेडिट लिया. आपको बता दें कि इरफ़ान ने जिन भास्करण की मदद की है वो लम्बे समय से प्लेयर्स के जूतों, पैड, गर्ल्स इत्यादि की मरम्मत करके अपना गुजारा करते थे.