डेमोक्रेसी इंडेक्स में भारत 10 पायदान नीचे फिसला, नागरिक स्वतंत्रता और CAA रहीं बड़ी वजह

नयी दिल्ली: आपने कुछ दिनों पहले न्यूज़ ज़रूर देखि होगी कि भारत भुखमरी, यानी के हंगर इंडेक्स में दुनियाभर के 117 देशों में से 102वें पायदान पर आ गया है. और अभी हाल ही इकानॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट द्वारा जारी किये गए नए आंकड़ों के हिसाब से भारत देश डेमोक्रेसी इंडेक्स में 10 पायदान नीचे की तरफ खिसक गया है. इससे पहले 2019 के नए इंडेक्स के हिसाब से पहले भारत का 41वां स्थान था.

नए डेमोक्रेसी इंडेक्स के ताज़े आंकड़ों के हिसाब से भारत अब 51 वें पायदान पर खड़ा है. इन सबका ज़िम्मेदार कौन होगा?. देश में युवकों को रोज़गार, शिक्षा देने के नाम पर सरकार आखिर कर क्या रही है?. बिका हुआ मीडिया सारे दिन हिंदी-मुस्लमान और पाकिस्तान चिल्लाता है.

देश का मीडिया ब्रेनवाश करने में लगा हुआ है

Democracy Index of India 2019-20

आखिर क्या वजह है कि हमारा अधिकतर मीडिया का एक बड़ा हिस्सा देश के डूबते हालातों पर डिबेट करने, बेरोजगार युवाओं की बात सरकार तक पहुंचाने में क्यों आनाकानी कर रहा है.

फिलहाल नए डेमोक्रेसी इंडेक्स जिसके अंतर्गत 5 चीजों को रखा गया है वे क्रम:श इस प्रकार हैं. चुनाव प्रक्रिया, बहुलतावाद, नागरिक स्वतंत्रता और सरकार के द्वारा किया गया कामकाज, इन सभी चीज़ों के आधार पर डेमोक्रेसी इंडेक्स को नापा जाटा है.

डेमोक्रेसी इंडेक्स में नीचे जाने की वजह नागरिक स्वतंत्रता रही

एक्सपर्ट की राय और इकानॉमिस्ट इंडेलिजेंस यूनिट द्वारा इसका सबसे बड़ा कारणबताया है कि भारत में “नागरिकता  स्वतंत्रता में कमी” मुख्य वजह रही है.

Bharat me nagrik swtantrta

2018 की बात करें तो भारत का कुल स्कोर 7.23 था, जो अब नीचे गिरकर 6.90 हो चुका है. यह दुनियाभर में 165 स्वतंत्र राज्यों और दो क्षेत्रों के लिए उनके यहाँ लोकतंत्र की वर्तमान स्थिति क्या है यह सब संक्षिप्त रूप से दर्शाता है.

भारत की बात करें तो रिपोर्ट में मौजूदा वर्तमान डेमोक्रेसी इंडेक्स वैश्विक रैंकिंग में 51वें पायदान पर लुड़क गया है. वहीँ अगर चीन की बात की जाय तो वहां की स्तिथि भी कुछ ठीक नहीं है.

चीन की हालत भारत से भी ज्यादा ख़राब

चीन की हालत भारत से भी ज्यादा खराब है, वहां भी लोकतंत्र पूरी तरह से डामाडोल हो चुका है. चीन डेमोक्रेसी इंडेक्स में भारत से 2 पायदान और नीचे है. 2019 के नए आंकड़ों के हिसाब से चीन वैश्विक रैंकिंग में अब 153 वें स्थान पर है.

रिपोर्ट में साफ़ तौर पर कहा गया है कि, पिछले कुछ सालों में खासतौर शिनजियांग के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में वहां के अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव पहले ज़े और भी ज़्यादा तेज़ हो गए हैं.

नयी उभरती हुई दुसरे देशों की अर्थव्यवस्थाओं में, ब्राजील, रूस, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देश का नाम है. आपको बता दें की बांग्लादेश का डेमोक्रेसी इंडेक्स नए आंकड़ों के हिसाब से 80 वें स्थान पर है.

उत्तर कोरिया की हालत सबसे बदतर

जबकी सबसे टॉप पर डेमोक्रेसी इंडेक्स में कोई है तो वो नॉर्वे देश है. यहाँ के देशवासी बिना किसी परेशानी के मस्त जीवन गुजारते हैं.

उसके बाद आइसलैंड, स्वीडन, न्यूजीलैंड, फिनलैंड, आयरलैंड, डेनमार्क, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और स्विट्जरलैंड जैसे देश हैं. जबकी उत्तर कोरिया के हालत सबसे ख़राब बताई जाती है. ये ग्लोबल रेंकिंग में 167 वें पायदान पर खड़ा है.

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