दुबई में भारतीय बिज़नेसमैन ने मुस्लिमों को लेकर की थी अभद्र टिप्पणी, अब हाथ जोड़कर आए…

पिछले कुछ सालों से, भारतीय मीडिया लकड़बग्घे की तरह मुसलमानों के पीछे पड़ा हुआ है. देश में जहाँ कही भी कोई छोटी बड़ी घटना होती है, तो बिकाऊ मीडिया का एक बड़ा भाग तुरंत उसमें मुस्लि’म एंगल खोजने लग जाता है. पिछले 2 साल पहले भी देशभर में जगह-जगह मुसलमानों को टारगेट किया गया, जिसमें से कई लोगों की जा’न तक चली गई. कुछ तो साफ-साफ सबूत होने के बावजूद भी बच निकले, जैसा के राजस्थान के पहलू खान के केस में हुआ था।

साथ ही इसके अलावा कई ऐसे और केस पूर्वी राजस्थान और पश्चिम बंगाल से भी सामने आये थे. सोशल मीडिया पर आपको कई ऐसे लोगों के फर्जी और असली अकाउंट देखने को मिल जाएंगे, जिनके टि्वटर हैंडल या फेसबुक प्रोफाइल से सारे दिन समुदाय विषेश के खिलाफ कंटेंट परोसा जाता है. जो काफी वायरल भी होता है।

यह कंटेंट देश और दुनियाभर के लोगों समेत खाड़ी देशों में भी देखा जाता है. तब वहां के रहवासी और प्रवासी के मन में भारत के प्रति क्या छवि बनती होगी ये शायद आपको बताने की ज़रुरत नहीं है. हालांकि, पिछले कुछ दिनों में ऐसे घटनाक्रम देखने को मिल रहे हैं, जिनसे भारत और खाड़ी देशों के रिश्तों में मनमुटाव बढ़ता नजर आ रहा है।

दरअसल, यूएई में सोशल मीडिया पर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कुछ भारतीयों की नफरत फैलाने वाली पोस्ट को लेकर असहज स्थिति पैदा हो गई है. इसकी तीखी आलोचना की जा रही है. मुस्लिमो और इस्लाम धर्म के अपमान को लेकर यूएई सरकार ने बड़ा ही सख्त रवैया अपना लिया है।

एक के बाद एक भारतीयो से जुड़े इस्लामोफोबिक टिप्पणी के मामले सामने आने से स्थिति गंभीर होती जा रही है. इसी बीच अब शारजाह के एरिज ग्रुप (Aries Group) के चेयरमैन सोहन राय ने मामले को और बिगाड़ दिया है।

गल्‍फ न्‍यूज की खबर के अनुसार, सोहन राय ने शनिवार को फेसबुक लाइव वीडियो में एक पोस्‍ट के लिए माफी मांगी जिसमें इस्‍लाम के विरोध में बातें की थीं. बिजनेसमैन ने कहा उनकी ऐसी कोई मंशा नहीं थी और वे किसी संप्रदाय विशेष की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहते थे।

बता दें सोहन राय ने मलयालम भाषा में यह कविता लिखी थी. उन्‍होंने इस कविता के जरिए बताया कि धर्म ने लोगों को अंधा बना दिया है और वे ईश्‍वर के नाम पर कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लागू नियमों का उल्‍लंघन कर रहे हैं।

जिसके बाद सोहन राय की काफी आलोचना हुई. तो सोहन राय ने मजबूर होकर, इंस्‍टाग्राम और अपने ट्विटर अकाउंट से कविता को हटा लिया हालांकि पोस्‍ट होने के बाद कुछ ही दिनों के भीतर यह कविता इंटरनेट पर वायरल हो गई. हालांकि इसमें किसी संप्रदाय विशेष का उल्‍लेख नहीं है।

लेकिन इसके बैकग्राउंड में एक फोटो लगी है जिसमें कुर्ता, पायजामा और टोपी पहने लोगों की भी’ड़ का नेतृत्‍व करता एक धर्मगुरू है. यह तस्‍वीर तब्‍लीगी जमात (Tablighi Jamaat) के सदस्‍यों की ओर इशारा कर रही है. हालांकि सोहन राय का कहना है कि कविता के साथ इस्‍तेमाल किए जाने वाले तस्‍वीर की गलती केरल के ग्राफिक डिजायनर की है।

सोहन राय ने माफ़ी मंगाते हुए कहा, मुझे इस बात का खेद है कि मैंने अनजाने में किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाई है. मैं विवाद में नहीं फंसना चाहता। जैसे ही मुझे इस बात का पता चला की लोगों की भावनाओं को चोट पहुंची है मैंने तुरंत फेसबुक लाइव वीडियो (Facebook live video) के जरिए माफी मांगी।

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