जब सरकारी पैसे से मदरसे नहीं चल सकते तो फिर कुंभ मेले का आयोजन क्यों? उदित राज ने पूछा

जब सरकारी पैसे से मदरसे नहीं चल सकते तो फिर कुंभ मेले का आयोजन क्यों? उदित राज ने पूछा

भारतीय जनता पार्टी की असम सरकार ने सूबे में सरकार द्वारा संचालित मदरसों को बंद करने का ऐलान किया हैं. जिसके बाद असम सरकार को चौतरफा आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. इसी बीच मदरसों को बंद किये जाने के असम सरकार के फैसले की कांग्रेस नेता डॉ उदित राज ने कड़ी आलोचना की हैं. इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जतना पार्टी और उनकी नीतियों पर निशाना भी साधा है.

उदित राज ने कुंभ मेले के आयोजन में सरकारी पैसे के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं. गुरुवार की सुबह उदित राज ने एक ट्वीट करके कहा कि असम सरकार ने सरकारी फंड से चलने वाले मदरसों को बंद करने का निर्णय किया है, ठीक इसी तरह यूपी सरकार को कुंभ मेले के आयोजन पर 4200 करोड़ रुपये नहीं खर्च करने चाहिए.

लेकिन उदित के इस ट्वीट पर हंगा;मा होने लगा और विवाद बढ़ता देख उदितराज ने अपना ट्वीट डिलीट कर लिया. उदित ने एक न्यूज़ चैनल से बातचीत के दौरान इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि संविधान के मुताबिक राज्य का कोई धर्म नहीं होगा हैं.

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे में राज्य को सभी को बराबर मानना चाहिए. किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए. इसी संदर्भ के तहत मैंने कुंभ मेले के खर्च का उदाहरण दिया था. लेकिन कई लोगों ने इसका गलत मतलब निकला.

आपको बता दें कि असम की बीजेपी सरकार ने सूबे के तमाम सरकारी मदरसों को बंद करने का ऐलान किया है. असम के शिक्षा मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कुरान की तालीम सरकारी पैसे से नहीं हो सकती है. अगर हमें ऐसा जारी रखना है तो हमें बाइबल और भगवद गीता दोनों की भी शिक्षा देनी चाहिए.

बता दें कि उदित राज के कुंभ को लेकर दिये गए बयान को बीजेपी ने गांधी परिवार से जोड़ दिया. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट करके कहा कि मित्रों यह है गांधी परिवार की सच्चाई.

पात्रा ने आगे कहा कि पहले अफिडेविट देकर सुप्रीम कोर्ट में कहा गया था कि भगवान श्री राम मात्र काल्पनिक है..उनका असल में कोई अस्तित्व नहीं है और अब प्रियंका वाड्रा जी का कहना है की कुंभ मेला का आयोजन भी बंद होना चाहिए. तभी तो पूरा देश और दुनिया कहती है राहुल और प्रियंका गांधी सुविधा-वादी हिंदू है.

साभार- आजतक