जज ने पूछा- प्रशांत भूषण तो माफ़ी मांग ही नहीं रहे, क्या किया जाए? AG ने दिया ये जवाब

सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमा’नना का मामला देश भर में तूल पकड़ चूका हैं. सुप्रीम कोर्ट प्रशांत भूषण से मांफी की मांग कर रहा हैं लेकिन प्रशांत भूषण ने ट्वीट करके बिना शर्त मांफी मांगने से भी साफ इनकार कर दिया हैं. इसी बीच अब केंद्र सरकार के वकील अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण को माफ कर देने का आग्रह किया.

वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उन्हें जे’ल भेजने की जगह फटका’र लगाकर या चेता’वनी देकर स्टेट्समैन जैसा संदेश सुप्रीम कोर्ट दें. इससे पहले भूषण के दो ट्वीट के चलते उन्हें कोर्ट ने आपराधिक अवमानना का दोषी करार दिया हैं.

सोमवार को भूषण ने एक पूरक बयान कोर्ट में दायर करके कहा कि माफी मेरी नजर में मेरी अंतरात्मा और उस संस्था की अवमानना हैं जिसे में सर्वोपरि मानता हूं. जिसके बाद जस्टिस अरुण मिश्रा, बीआर गवई और कृष्ण मुरारी की बेंच ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया हैं जिसे दो सितंबर को सुनाया जाएगा.

वहीं सुनवाई के दौरान केके वेणुगोपाल ने कहा कि प्रशांत भूषण का बयान शायद सिर्फ कोर्ट को तथ्यों के बारे में बताना और सुधारों के लिए कहना था. इस मामले में उन्हें माफ़ करके सिर्फ चे’तावनी देकर छोड़ देना चाहिए.

जिस पर जस्टिस मिश्रा ने कहा कि अगर आप भूषण के बयान पर नजर डाले तो कहा जा सकता हैं कि इसमें एक सकारात्मक हिस्सा भी शामिल हैं और वो हैं उनका यह कहना कि उन्हें संस्था पर विश्वास हैं. लेकिन उन्होंने मांफी नहीं मांगेंगे की बात कहीं हैं क्योंकि उन्होंने कोई गलती नहीं की है. हर कोई गलती करता है और उसे उस शख्स को ये समझना चाहिए.

मिश्रा ने आगे कहा कि यदि कोई व्यक्ति कहता हैं कि उसने कोई गलती ही नहीं की हैं, उसे बार-बार मौका देने के बाद भी वो माफ़ी नहीं मांगता हैं तो यह कहने का कोई मतलब ही नहीं है कि दोबारा ऐसा मत करना? ये हमारे या उनके बारे में नहीं हैं. यह संस्था के बारे में है.

जस्टिस मिश्रा ने कहा कि अगर भूषण मानते हैं कि उन्होंने कुछ गलत किया है तो फिर चेतावनी देना का उद्देश्य क्या है? उन्होंने इस संस्था, इस कोर्ट के न्यायाधीशों के खिलाफ कई अपमानज’नक टिप्पणियां की हैं. वेणुगोपाल ने कहा कि वो दोबारा ऐसा नहीं करेंगे.

जस्टिस मिश्रा ने कहा कि उन्हें ऐसा कहने दीजिए, यह बहुत सरल था. मामला दो ट्वीट्स में था लेकिन बाद में उन्होंने इन ट्वीट्स में और रंग जोड़ दिए.