अनुच्छेद 370 हटने के बाद क्या जम्मू-कश्मीर को लेकर मोदी और शाह ने बदला है नजरिया?, पढ़िए उपराज्यपाल बदलने की कहानी

जम्मूकश्मीर से अनुच्छेद 370 ख’त्म करने के बाद 1985 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस ऑफिसर गिरीश चंद्र मुर्मू को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का पहला उपराज्यपाल नियुक्त किया गया था. अनुच्छेद 370 ख’त्म होने के बाद वहां के सामान्य जनजीवन पर कई तरह की पाबंदियां लागू कर दी गई थी. 370 हटा’ने को एक साल पूरा हो चूका है और अब जम्मू कश्मीर से अधिकांश पबादियाँ हटा ली गई है.

अब मुर्मू के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वस्त और पूर्व रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल का कार्यभार सौंपा गया है. उनकी नियुक्ति को राजनीतिक गलियारों में एक अलग नजरिये से देखा जा रहा है. राजनीतिक मामलों के जानकार और जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर आनंद कुमार ने कश्मीर में अचानक हुए इस बदलाव के पीछे एक संभावना जताई है.

उनका मानना है कि पीएम मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दृष्टिकोण में कश्मीर को लेकर कुछ अंतर आ गया है. पिछले साल जब अनुच्छेद-370 हटा’ई गई तब मोदी की सलाह थी कि कोई भी सख्त कदम उठाने से पहले सब कुछ सामान्य होने के लिए थोड़ा इंतजार किया जाए लेकिन शाह को यह मंजूर नहीं था.

बीजेपी के वरिष्ठ राजनेता मनोज सिन्हा को उपराज्यपाल बनाने के पीछे जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक समाधान की एक नई राह खोजना पीएम मोदी की मंशा है. प्रोफेसर आनंद कुमार के अनुसार पीएम मोदी हमेशा से कश्मीर मामले को लेकर संजीदा रहे है. यही कारण है कि उन्होंने इसे लेकर अपने पहले कार्यकाल में कोई कदम उठाने की जल्दबाजी नहीं की.

लेकिन इस बार केंद्रीय गृह मंत्रालय अमित शाह के पास है, उन्होंने बिना देर करें 370 हटा’ने की राह बनानी शुरू कर दी और इसमें उन्हें मोदी का भरपूर साथ भी मिला. आनंद कुमार कहते है कि पीएम मोदी कश्मीर मुद्दे का राजनीतिक समाधान अपने तरीके से होना चाहिए. इसी के चलते मनोज सिन्हा को चुना गया है.

सिन्हा की गिनती हमेशा से मोदी के खास लोगों में होती है. यही वजह है कि उन्हें उपराज्यपाल की कमान दी गई है. कश्मीरी पंडितों को दोबारा बसाने की योजना पर काम करना है और जम्मू में नौकरियों को लेकर भी असमंजस की स्थिति है. साथ ही कई मुद्दों को साफ ना होने के चलते लोगों में बसे डर को दूर करना पड़ेगा.

आनंद कुमार ने कहा कि सिन्हा को राजनीतिक भाषा में जम्मू-कश्मीर के लोगों को यह समझाना होगा कि आज भी कश्मीर पर उन्ही का वर्चस्व है. दरअसल यहां के मुस्लिम समझते है कि अब उनका वर्चस्व ख’त्म होने लगा है और वो चाहते हैं कि कश्मीर का अपना वजूद बना रहे.

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