ख्वाज़ा ग़रीब नवाज़ को लेकर अमर्या’दित टिपण्णी करने के मामले में पत्रकार अमीश देवगन मुश्किल में

ख्वाज़ा ग़रीब नवाज़ के अपमान के मामले में सुप्रीम कोर्ट का अमीश देवगन के ख़िलाफ़ FIR रद्द करने से इंकार.

नई दिल्ली, 8 दिसम्बर 2020: अक्सर अपनी टिप्पणियों को लेकर चर्चा में रहने वाले पत्रकार और न्यूज़ एंकर अमीश देवगन के लिए एक बार फिर से मुश्किलें और बढ़ गई है. आपको नाता दें सुप्रीम कोर्ट ने सूफ़ी संत ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के बारे में कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में अमीश देवगन के खिलाफ दायर की गई एफआईआर को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करने से इनकार कर दिया है।

गौरतलब है की अमीश देवगन ने सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती पर एक टिप्पणी कर दी थी जिसके बाद उन पर एफ आई आर दर्ज हो गई थी और अब उस FIR को रद्द करने से सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया है। अमीश देवगन ने अपने शो आर- पार में 15 जून के दिन सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को लेकर अपमा’नज’नक बातें कही थी।

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अमीश देवगन अपने शो में पूजा स्थल के विशेष प्रावधान अधिनियम के संबंध में जनहित याचिका पर एक बहस की मेजबानी कर रहे थे इसी दौरान उन्होंने सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती पर टिप्पणी कर दी।

उन्होंने कहा कि ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती एक हम’ला’वर और लुटेरा था. बता दें कि सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को गरीब नवाज के रूप में जाना जाता है ऐसे में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को हमलावर और लुटेरा कहने पर लोगों ने अमीश के खिलाफ FIR. दर्ज करवा दी।

हालांकि अपनी टिप्पणी के बाद जब उन्हें लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा तो अमीश ने अपने ही शो में माफी मांगी और अपने ट्विटर अकाउंट से भी अपनी सफाई दी।

अमीश देवगन ने माफी मांगते हुए ट्वीट किया और लिखा कि. मैंने अनजाने में खिलजी को चिश्ती के रूप में संदर्भित किया. में ईमानदारी से इस गंभीर त्रुटि के लिए माफ़ी माँगता हूँ और यह सूफ़ी संत मोइनुद्दीन चिश्ती के अनुयायियों की नाराज़गी का कारण हो सकता है. मैंने अतीत में उनकी दरगाह पर आशीर्वाद माँगा था. मुझे अपनी इस त्रुटि पर अफ़सोस है।

लेकिन अब इस की टिप्पणी के बाद उन पर दर्ज हुए मामले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द करने से इनकार कर दिया है। अमीश देवगन के खिलाफ दर्ज हुए सभी मामलों को राजस्थान के अजमेर स्थानांतरित कर दिया है। और साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि 8 जुलाई की जांच और पत्रकार के खिलाफ कठोर कार्यवाही पर रोक का आदेश बना रहेगा।