बड़ी खबर: बीजेपी राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को कोलकाता पुलिस ने हिरासत में लिया

CAA को लेकर पूरे देश में हंगामा हो रहा है. इसका विरोध प्रदर्शन काफी देखा जा रहा हैं. तो कहीं इसके समर्थन में रैलियां निकाली जा रहीं हैं. देशभर में भाजपा के बड़े नेताओ द्वारा भी इसके समर्थन में कई रैलियां निकाल चुके हैं. हाल ही में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी नागरिकता कानून के समर्थन में भाजपा के नेताओं ने रैलियां निकालीं थीं.

आपको याद होगा की मध्यप्रदेश के राजगढ़ में भी एक समर्थन रैली निकालते समय राजगद जिले में महिला कलेक्टर द्वारा भाजपा कार्यकर्त्ता को थप्पड़ मारने के बाद काफी हंगामा हुआ था. जिसका खासतौर पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने विरोध किया था.

BJP Mahasachiv kailash vijayvagriya kolkata me detain kiye gaye

कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट कर जानकारी दी, हमें गिरफ्तार कर लिया गया है

अभी-अभी खबर मिली है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और बीजेपी नेता मुकुल रॉय नागरिक संसोधन कानून (CAA) के समर्थंक में पश्चिम बंगाल के कोलकाता में, टोलीगंज फेरी इलाके से  रैली निकालने की तैय्यारी कर रहे थे, उस दौरान कोलकाता पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया.

बताया जा रहा है की कैलाश विजयवर्गीय ने सीएए के समर्थन में ‘अभिनंदन यात्रा’ निकाल रहे थे. इसका मकसद लोगो के बीच फैले सीएए के भ्रम को दूर करना था.

जिसकी उन्होंने इजाजत नहीं ली थी.जिसके चलते पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और उस स्थान से दूर ले गए.

कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट किया ”कोलकाता में आज सीएए के समर्थन में आज मेरी रैली थी. पुलिस ने मुझे और मुकुल रॉय को गिरफ्तार कर लिया है और लाल बाज़ार पुलिस हेडक्वार्टर ले जा रहे हैं.

सांसद में पारित किसी कानून के समर्थन में रैली निकालना कोनसा अपरा’ध है, जो हमें गिरफ्तार किया गया? मुख्यमंत्री ने लोक तंत्र को मजाक बना दिया है. यहां कानून की बात करना भी अपराध बन गया.

फिलहाल भाजपा देश के लोगों को नागरिकता कानून को अच्छी तरह समझाने में नाकाम सी दिख रही है, क्योंकि इसको लेकर देशभर में बड़े स्तर पर कई जगह दिल्ली के शाहीन बाग़ की तरह व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं.

इन सभी नागरिकता कानून के विरोध प्रदर्शनों में मुस्लिम महिलाओं का खासा रोल देखने को मिल रहा है. अब देखना यह है कि दिल्ली चुनाव के बाद सुप्रिम कोर्ट इन प्रदर्शनों को लाकर क्या फैसला करता है.

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