कोरोना सं’कट में जहां कंपनियां कर रही कर्मचारियों की छंटनी, वहीं इस कंपनी ने कर्मचारी की मौ’त के बाद उसके शव पर खर्च कर दिये 50 लाख

कोरोना महामारी और लॉकडाउन के चलते दुनिया भर में मंदी छाई हुई हैं. ऐसे हालातों में कंपनियां अपने कर्मचारियों की छटनी करने में लगी हुई हैं. वहीं दूसरी तरह इस संक’ट के समय में भी एक कंपनी ने मानवता नहीं छोड़ी. इस कंपनी द्वारा अपने मैनेजिंग डायरेक्टर की मौ’त के बाद उनके परिजन की फ़िक्र करते हुए मानवता की अनूठी मिसाल पेश की, जिसके बारे में जानकर आप कहेगें कि दुनिया में आज भी मानवता जिंदा हैं.

दरअसल कंपनी ने अपने मैनेजिंग डायरेक्टर के शव को उनके परिवार तक पहुंचाने के लिए एक पूरा का पूरा 180 सीटर प्लेन बुक कर डाला. इस कंपनी का नाम Vesuvius बताया जा रहा हैं. कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर काम करने वाले रितेश डूंगरवाल की मौ’त हो गई थी.

जिसके बाद कंपनी ने डूंगरवाल के परिवार से किसी भी तरह के कोई भी खर्च की बात ना करते हुए पूरा का पूरा 180 सीटों वाला एक प्लेन बुक कर दिया. कंपनी ने प्लेन का पूरा खर्च उठाते हुए डूंगरवाल के मृत’क शरीर को कोलकाता से उनके परिवार के पास इंदौर भेजा दिया.

इसके आलावा कंपनी ने अपने दो बड़े अधिकारी भी प्लेन के साथ श’व लेकर इंदौर भेजे. यह कर्मचारी कंपनी के निर्देश पर दिवं’गत डूंगरवाल का अंतिम संस्कार कराने के बाद उनके परिवार के साथ तीन दिनों तक रुके और उनकी हिम्मत बढ़ाई. सभी कार्यक्रम पूरे करवाने के बाद ही यह कर्मचारी वापस कोलकाता लौटे.

मीडिया को मिल रही जानकारी के अनुसार कोलकाता से श’व को इंदौर लाने के लिए कोई प्लेन नहीं मिल पा रहा था, ऐसे में कंपनी ने दिल्ली से एक प्लेन बुक कराया और उसे कोलकाता बुलाकर डूंगरवाल के श’व को उनके परिवार के पास इंदौर तक पहुंचाया.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस सारे काम को अंजाम देने में कंपनी को करीब 50-60 लाख रुपये का खर्च आया हैं. बताया जा रहा है कि रितेश पिछले दो सालों से कंपनी के लिए काम कर रहे हैं.

हाल ही में 19 अगस्त को हार्ट अटैक आने के चलते उनका निध’न हो गया था. उनकी डेडबॉडी लाने में परिवार को दिक्कत आ रही थी. जिसके बाद कंपनी ने प्लेन की व्यवस्था कर दी.

जहां एकतरफ आर्थिक तंगी और गिरती अर्थव्यवस्था का हवाला देते हुए कई कंपनियों अपने कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा रही हैं तो वहीँ कुछ ऐसी कंपनियां भी हैं जो अपने कर्मचारियों के म’रने के बाद भी उनके परिवार को तक संभाले हुए हैं. उन्हें भी हिम्मत दे रही हैं और उनका हौसला बढ़ा रही हैं.