दिल्ली दं’गा: केंद्र सरकार और पुलिस की तारीफ कर अल्पसंख्यकों के ज’ख्मों पर नमक छि’ड़क रहे हैं केजरीवाल

उत्तर पुर्वी दिल्ली में जो भयावह हिं’सा हुई उसने की कई परिवार को तहस नहस कर दिया। बड़ी तादाद में लोगो ने अपनी जा’न गं’वा दी तो वही कई सौ लोग घायल हो गए हैं। कई परिवार ने अपना घर दुकान सब कुछ दिया। अब उनके पास सिर्फ पहने हुए कपड़ो के अलावा कुछ नहीं। ऐसे मुश्किल वक्त में वे लोग रैन बसेरा में रहने को मजबूर है।

वही दिल्ली हिं’सा के बाद वे लोग खास तौर से छला महसूस कर रहे हैं जिन्होंने हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) को वोट दिए थे। अपने को धोखा खाए मानने वालों में अल्पसंख्यकों का बहुत बड़ा वर्ग तो है ही, वे लोग भी हैं जो जानते मानते रहे हैं कि बीजेपी बातों की धनी है, काम करने में उसका यकीन कम ही है।

इस वक्त भी अल्पसंख्यकों को अजीब तो लग रहा है. क्योकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के नेता सीएए, एनपीआर, एनआरसी पर अपना रुख तो स्प’ष्ट नहीं कर रहे, शाहीन बाग जाने की बात तो दूर, वहां के बारे में कुछ बोलने से भी परहेज कर रहे हैं।

बता दें उत्तर पूर्वी दिल्ली में हिं’सा के दौरान दिल्ली की आप सरकार ने जिस तरह चु’प्पी ओढ़े रखी, उसके बाद किसी को कोई मुगालता नहीं रहा कि यह तो दूसरी पार्टी के वेश में बीजेपी ही है। रही सही कसर तब पूरी हो गई जब केजरीवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद हिं’सा पर कोई बात नहीं कही। बल्कि केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करने की बात कही।

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद केजरीवाल ने दिल्ली पुलिस पर कोई अं’गुली नहीं उठाई और केंद्र सरकार की तारीफ की। इससे पहले केजरीवाल सरकार ने जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार के खिलाफ मुकदमा चलाने की इजाजत देकर केंद्र सरकार और बीजेपी को खुश कर ही दिया था।

गौरतलब है की दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं और फायर सर्विसेज का इतना प्रचार हुआ था, कि मानो हर जरूरतमंद के लिए स्वास्थ्य सेवाएं हाथ भर दूरी पर खड़ी हैं। लेकिन दं’गों के दौरान न तो हिं’सा प्रभावित इलाकों तक फा’यर सर्विस पहुंची और न ही घरों और दुकानों को ज’लने से बचा सके।

दिल्ली में 23 फरवरी को हिं’सा शुरू होने के दस दिनों बाद तक भी दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री न तो घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे और न ही केजरीवाल ने हिं’सा प्रभावित इ’लाकों का दौरा किया। जबकि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ऐसे इलाकों में जाकर लोगों के दुख दर्द बांटे। वैसे, मनीष सिसोदिया एक दिन पहले जरूर घू’म आए हैं लेकिन शायद केजरीवाल की सोई आ’त्मा अब जगे।

हिं’सा की आ’ग में झुलसे इलाकों में राहत का काम जिस तरह शुरू किया गया, वह केजरीवाल की मंशा को बताने के लिए पर्याप्त है। केजरीवाल ने तीन दिनों तक दावा किया कि हिं’साग्र’स्त इलाकों में राहत शिविर काम कर रहे हैं लेकिन 5 मार्च को इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने तक सिर्फ एक शिविर काम कर रहा था।

लेकिन इन सब में सबसे हैरान करने वाली बात की दिल्ली पुलिस प्रशासन ने खाना पानी पहुंचाने के काम में भी खूब रोड़े डाले ओखला के मशहूर हकीम बावर्ची के फैसल ने 28 फरवरी को 600 किलो बिरयानी जाफराबाद इलाके में फ्री वितरण के लिए तैयार किया लेकिन प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी।

वही (जेएनयू) छात्रसंघ ने पेशकश की कि हिं’सा-प्रभावित इलाके के छात्रों को जेएनयू के होस्टलों में कुछ दिन रहने की अनुमति दी जानी चाहिए और यहां रह रहे छात्रों को अपने रूम शेयर करने में दिक्कत नहीं होगी। यह सब मानवीयता के नाम पर करने का प्रस्ताव था। लेकिन जेएनयू प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी।

शुक्र है कि कई संगठन बिना किसी भेदभाव इन इलाके में राहत के काम में लगे हुए हैं। हां, इनके बीच आप नेता कपिल मिश्रा अब भी अलग से पहचाने जा सकते हैं जिन्होंने 71 लाख रुपये की सहायता सिर्फ हिंदू पीड़ितों को देने की घोषणा की है।

ऐसे में समझा जा सकता है कि सरकारों का रोल क्या और कितना है। इसीलिए सोशल ए’क्टिविस्टों- अं’जलि भारद्वाज, एनी राजा, पूनम कौशिक, गीतांजलि कृष्णाऔर अमृता जौहरी की हिं’सा प्रभावित इलाकों के दौरे के बाद की रिपोर्ट के इस अंश का खास महत्व है।

Leave a Comment