अब ये क्या कह गए कामरा?, अवमानना का केस होने के बावजूद कुणाल कामरा ने एक बार फिर उड़ाया सुप्रीम कोर्ट का मजाक

तमाम सूबतों और गवाहों को मद्देनजर रखते हुए ये अदालत फिर से पाखं'ड की सीमा पार करती है: कुणाल कामरा फिर उड़ाया सुप्रीम कोर्ट का मजाक

नई दिल्लीः स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा (Kunal Kamra) सुप्रीम कोर्ट के जजों के बारे में एक बार फिर विवा’दि’त ट्वीट किया है। इससे पहले कुणाल कामरा ने ट्विटर पर अपने खिलाफ अवमानना का केस चलाने की मंजूरी देने वाले अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल के नाम एक पात्र पोस्ट किया था। जिसमे उन्होंने लिखा- कोई वकील नहीं, कोई माफी नहीं, कोई जुर्माना नहीं।

बता दें शुक्रवार को ट्वीट करते हुए कुणाल कामरा कहा था की वह न तो अपना ट्वीट डिलीट करेंगे, न माफ़ी माँगेंगे और न ही अदालत में अपना पक्ष रखने के लिए कोई वकील करेंगे. उन्होंने कहा, “मैं अपने ट्वीट को वापस लेने या उसके लिए माफी माँगने का इरादा नहीं रखता।

Kunal Kamra 1

उन्होंने कहा की मेरा मानना ​​है कि वे अपनों के लिए बोलते हैं, कामरा ने कहा की मैने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि उन्‍होंने जो भी ट्वीट्स किए, वह सुप्रीम कोर्ट के ‘प्राइम टाइम लाउडस्‍पीकर (अर्णब गोस्‍वामी) के पक्ष में दिए गए भेदभावपूर्ण फैसले पर मेरी राय थी।

वही अब एक बार फिर कामरा ने कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट का मजाक उड़ाते हुए उन्होंने एक खबर का लिंक शेयर की है जिसमे उन्होंने लिखा कि तमाम सूबतों और गवाहों को मद्देनजर रखते हुए ये अदालत फिर से पाखं’ड की सीमा पार करती है। ट्वीट में उन्होंने केरल के पत्रकार से जुड़ी एक लिंक शेयर की है जिसमें टॉप कोर्ट ने सिद्दीक कप्पन से जुड़ी याचिका की सुनवाई 20 नवंबर तक के लिए टाल दी गई है।

गौरतलब है की, पत्रकार कप्पन यूपी के हाथरस मामले में जा’न गंवाने वाली दलित युवती के परिवार से मिलने जा रहे थे, जिसके चलते यूपी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। वही इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यूपी सरकार को एक नोटिस जारी किया।

दरअसल स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा के इस ट्वीट को अर्नब गोस्वामी के मामले से जोड़कर देखा जा रहा है। क्योकि सुप्रीम कोर्ट ने छुट्टी के दिन अर्नव गोस्वामी के मामले की सुनवाई की जिसमें उन्हें अंतरिम जमानत मिल गई थी जबकि पत्रकार कप्पन की याचिका पर तुरंत ऐसी कोई सुनवाई नहीं की गई।

वही इसी पर तंज कसते हुए पूर्व में कामरा ने कहा था कि जिस गति से सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रीय महत्व के मु’द्दों को ऑपरेट करती है यह समय है कि महात्मा गांधी की फोटो को हरीश साल्वे के फोटो लगा दी जाए।

एक ट्वीट में उन्होंने कहा था कि जस्टिस डीवाई चंद्रचूड एक फ्लाइट अटेंडेंट हैं जो प्रथम श्रेणी के यात्रियों को शैम्पेन ऑफर कर रहे हैं क्योंकि वो फास्ट ट्रैक्ड हैं। जबकि सामान्य लोगों को यह भी नहीं पता कि वो कभी चढ़ या बैठ भी पाएंगे, सर्व होने की तो बात ही नहीं है। कुणाल कामरा के इन ट्वीट्स को कोर्ट की अवमानना माना गया।

नके ट्वीट्स के बाद अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ कथित अपमानजनक ट्वीट करने के लिए उन पर कोर्ट की अवमानना का मामला चलाने की अनुमति दी थी। अपने खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू होने पर कामरा ने प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा था कि ना वकील करुंगा, ना माफी मागूंगा और ना जुर्माना दूंगा। उन्हें इसे वक्त की बर्बादी बताया। कामरा ने कहा कि उनके ट्वीट्स को कोर्ट की अवमानना माना गया। जबकि उनकी प्रतिक्रिया सुप्रीम कोर्ट के पक्षपातपूर्ण फैसले के बारे में विचार था जो कोर्ट ने प्राइम टाइम लाउडस्पीकर के लिए दिए थे।