सुप्रीम कोर्ट अवमानना मामले पर बोले कुणाल कामरा, ”न माफ़ी माँगूंगा, न वकील रखूँगा”

स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने कहा, सुप्रीम कोर्ट में महात्‍मा गांधी की जगह हरीश साल्‍वे की फोटो लगाने को कहा था, मैं जोड़ना चाहूंगा कि पंडित नेहरू की फोटो हटाकर महेश जेठमलानी की फोटो लगा दी जाए।

नई दिल्लीः स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा (Kunal Kamra) ने अपने ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का मामला दर्ज होने के बाद देश के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल के नाम एक संदेश जारी किया है. आपको बता दें सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को लेकर आ’पत्तिज’न’क ट्वीट करने के मामले में देश के अटॉर्नी जनरल के.के वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट के ख़िलाफ़ कथित अपमा’नजन’क ट्वीट करने के मामले में कुणाल पर न्यायालय की अवमानना का मामला चलाने की अनुमति दी थी।

इसी मामले को लेकर कुणाल कामरा (Kunal Kamra) ने शुक्रवार को ट्विटर जारी कर कहा की वह न तो अपना ट्वीट डिलीट करेंगे न माफ़ी माँगेंगे और न ही अदालत में अपना पक्ष रखने के लिए कोई वकील रखेंगे. उन्होंने कहा, “मैं अपने ट्वीट को वापस लेने या उसके लिए माफी माँगने का इरादा नहीं रखता।

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उन्होंने कहा की मेरा मानना ​​है कि वे अपनों के लिए बोलते हैं, कामरा ने कहा की मैने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि उन्‍होंने जो भी ट्वीट्स किए, वह सुप्रीम कोर्ट के ‘प्राइम टाइम लाउडस्‍पीकर (अर्णब गोस्‍वामी) के पक्ष में दिए गए भेदभावपूर्ण फैसले पर मेरी राय थी।

वही एक अन्य ट्वीट करते हुए कुणाल कामरा चिट्ठी में लिखते हैं, “प्रिय जजों, श्री केके वेणुगोपाल जी, मैंने हाल ही में जो ट्वीट किए, उन्‍हें न्‍यायालय की अवमानना बताया गया है, मैंने जो भी ट्वीट किया वे सुप्रीम कोर्ट के एक प्राइम टाइम लाउडस्‍पीकर के पक्ष में दिए गए पक्षपाती फैसले के प्रति मेरा नजरिया था।

उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि मुझे यह मान लेना चाहिए कि मुझे अदालत लगाने में बड़ा मजा आता है और अच्‍छी ऑडियंस पसंद आती है. सुप्रीम कोर्ट जजों और देश के शीर्ष कानूनी अधिकारी जैसी ऑडियंस शायद सबसे वीआईपी हो, लेकिन मुझे समझ आता है कि मैं किसी भी जगह परफॉर्म करूं, सुप्रीम कोर्ट के सामने वक्‍त मिल पाना दुर्लभ होगा।

वही कामरा आगे लिखते हैं, मेरी राय नहीं बदली है क्‍योंकि दूसरों की निजी स्‍वतंत्रता के मामलों पर कोर्ट की चुप्‍पी बिना आलोचना के नहीं गुजर सकती, मैं अपने ट्वीट वापस लेने या उनके लिए माफी मांगने की मंशा नहीं रखता हूं। मुझे लगता है कि वे यह खुद बयान करते हैं, मैं अपनी अवमानना याचिका, अन्‍य मामलों और व्‍यक्तियों जो मेरी तरह किस्‍मतवाले नहीं हैं, की सुनवाई के लिए समय मिलने (कम से कम 20 घंटे अगर प्रशांत भूषण की सुनवाई को ध्‍यान में रखें तो) की उम्‍मीद रखता हूं।

कामरा आगे लिखते हैं, क्‍या मैं यह सुझा सकता हूं? कि नोटबंदी से जुड़ी याचिका, J&K के विशेष दर्ज को र’द्द करने वाले फैसले के खिलाफ याचिका, इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड्स की कानूनी वैध’ता को चुनौती देने वाली याचिका और अन्‍य कई ऐसे मामलों में सुनवाई की ज्‍यादा जरूरत है। वरिष्‍ठ एडवोकेट हरीश साल्‍वे की बात को थोड़ा सा मरोड़कर कहूं तो ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण मामलों को मेरा वक्‍त मिलेगा तो आसमान फट पड़ेगा क्‍या?

उन्होंने आखरी में लिखा की, “सुप्रीम कोर्ट ने मेरे ट्वीट को अबतक कुछ भी घोषित नहीं किया, लेकिन वो जब भी करें तो मैं उम्‍मीद करता हूं कि अदालत की अवमानना घोषित करने से पहले वो थोड़ा हंसेंगे।