फैक्ट चेक: क्या भारतीय तिरंगे को हैदराबादी इस मुस्लिम महिला ने डिजाइन किया था?

देश को स्वतंत्रता मिलने के 74 साल भी राष्ट्रीय ध्वज को लेकर जारी विवाद थमने का नहीं ही नहीं लेता. हर साल राष्ट्रीय दिवसों पर ये विवाद सामने आ जाता है और यह विवाद है राष्ट्रीय ध्वज को किसने डिजाइन किया था. अगर हम विकीपीडिया पर इसका जवाब ढूंढेंगे तो पिंगली वेंकैया का नाम मिलेगा. लेकिन कई इतिहासकारों और बहुत से इंटरनेट यूजर्स भी इस पर आंख बंद करके विश्वास नहीं करते है.

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल की जा रही हैं, जिसमें बताया जा रहा है कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज हैदराबाद की मुस्लिम महिला श्रीमती सुरैया बदरूद्दीन तैयबजी द्वारा डिजाइन किया गया था. इंडिया टुडे फैक्ट चेक टीम ने ऐतिहासिक तथ्यों को खंगाला और वायरल पोस्ट की सच्चाई जानने की कोशिश की.

राष्ट्रीय ध्वज को शुरू में इसे आंध्र प्रदेश के पिंगली वेंकैया द्वारा डिजाइन किया गया जिसके बीच में चरखे को भी शामिल किया गया था. लेकिन 1931 में कांग्रेस की ध्वज समिति ने इसमें कुछ बदलाव किए.

संविधान सभा ने राष्ट्रीय ध्वज को लेकर प्रस्ताव 22 जुलाई 1947 को पारित किया था और इस दौरान चरखे के स्थान पर अशोक चक्र को लिया गया. लेकिन इस प्रस्ताव में राष्ट्रीय ध्वज के डिजाइनर के तौर पर ना तो पिंगली वेंकैया था और ना ही सुरैया तैयबजी के नाम का उल्लेख था.

इस लेकर सुरैया तैयबजी की बेटी लैला तैयबजी ने द वायर को बताया कि किस तरह उनके माता-पिता ने अशोक च्रक का विचार दिया और उनकी मां ने ध्वज का ग्राफिक खाका तैयार किया था.

आपको बता दें कि सुरैया तैयबजी हैदराबाद के एक प्रसिद्ध मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखने वाली एक नामचीन कलाकार थीं. क्या सुरैया तैयबजी ने वाकई राष्ट्रीय ध्वज को डिजाइन किया था? के सवाल पर इतिहासकार दो गुटों में बांट जाते हैं.

गैर सरकारी संगठन फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया के मुताबिक ये सुरैया बदरुद्दीन तैयबजी का ही डिजाइन था जिसे संविधान सभा द्वारा राष्ट्रीय ध्वज के लिए मंजूर किया था. वहीं कई इतिहास पिंगली वेंकैया के नाम को आगे रखते हैं.

प्रसिद्ध इतिहासकार सैयद इरफान हबीब कहते है कि यह एक विवादित मामला है और ऐसा कोई ठोस ऐतिहासिक दस्तावेज मौजूद नहीं है जिसके आधार पर साफ तौर पर कुछ कहा जा सके. लेकिन हम ना तो पिंगली वैंकेया के परिवार के दावों को खारिज कर सकते हैं और ना ही सुरैया तैयबजी के.

क्या सामने आय पड़ताल में?

संसदीय अभिलेखों से सामने आया कि फ्लैग प्रेजेंटेशन कमेटी के सदस्यों में सुरैया तैयबजी का नाम शामिल था. इस कमेटी ने 14 अगस्त 1947 को राष्ट्रीय ध्वज को पेश किया था लेकिन ऐसा कोई दस्तावेज मोजूद नहीं है जो यह कहता हो कि इसे सुरैया तैयबजी द्वारा डिजाइन किया गया था या नहीं. इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट को सही नहीं कहा जा सकता हैं.

साभार- आजतक