क्या ऐसे कोरोना महामारी से जंग लड़ेगा भारत, पढ़े ये रिपोर्ट

देश भर से लगातार जाति, धर्म और समुदाय के आधार पर भेदभाव जैसी खबरें सुनने को मिल रही हैं. देश भर में फैले कोरोना वायरस के बाद जिस तरह से भारतीय मीडिया ने अपने प्रोपेंडे के तहत तबलीग़ी जमात के प्रति जो जहर बोया वो लोगों के दिल और दिमाग में घर कर गया हैं. आज भी बड़े पैमानें पर लोग कोरोना वायरस को फ़ैलाने के लिए मुस्लिम समुदाय को दोषी मानते हैं जबकि हाईकोर्ट भी साफ कह चूका हैं कि मीडिया ने जमात को बली का बकरा बनाया था.

लेकिन मीडिया के जहर का असर आज भी देखने को मिल रहा हैं. ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला मामला मध्यप्रदेश के इंदौर जिले से सामने आया हैं. यहां पर कुछ लोगों ने मुस्लिम विरोधी पोस्टर लगा रहे हैं.

इन पोस्टरों में लिखा गया हैं इस गांव में मुस्लिम व्यापारियों का आना सख्त मना हैं और नीचे निवेदक के तौर पर समस्त ग्रामवासी लिखा गया हैं. वहीं जब इस मामले की जानकारी पुलिस को लगी तो उन्होंने मौके पर पहुंच कर पोस्टर हट’वा दिया लेकिन यह पोस्टर किसने लगवाए हैं यह पता करने में पुलिस नाकामयाब रही हैं.

मीडिया द्वारा जमात को लेकर फैलाई गई झूठी खबरों के बाद से ही इस तरह के मामले देखने को मिल रहे हैं. हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी को भी इसे लेकर ट्वीट करके संदेश देना पड़ा था. उन्होंने ट्वीट में कहा था कि कोरोना वायरस किसी जाति या धर्म को नहीं देखता हैं, यह एक बीमारी हैं.

लेकिन इसके बाद भी मुस्लिम विरोधी मामले लगातार सामने आ रहे हैं. वहीं इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ट्वीट करके सूबे के सीएम शिवराज सिंह पर निशाना साधा हैं.

उन्होंने लिखा कि क्या यह कृ’त्य प्रधानमंत्री मोदी की अपील के खिलाफ नहीं हैं? क्या यह हमारे कानून में दण्डनीय अपराध नहीं है? मेरे यह सवाल सीएम चौहान और मध्यप्रदेश पुलिस हैं. समाज में इस तरह का विभाजन-बिखराव देश हित में नहीं है.

बता दें कि यह पोस्टर इंदौर जिले के पालमपुर गांव में काफी दिनों पहले देखने को मिले थे. जिसके बाद पुलिस ने इन्हें हट’वा दिया था. इस मामले को लेकर पुलिस ने कहा था कि कुछ शरारती तत्वों द्वारा पोस्टर लगाने की यह शरारती हरकतें की गई है हमने वह पोस्टर ह’टवा दिया है. पुलिस जांच करके आरोपी का पता लगा रही हैं.