लेडी सिंघम से बहस कर रहे थे भाजपा कार्यकर्ता, चालान कर जेल भेजा तो अगले दिन ट्रांसफर हुआ

पुलिस अफसर श्रेष्ठा ठाकुर को लेडी सिंघम के नाम से जाना जाता है, सोशल मीडिया में वीडियो वायरल होने के बाद पहचान बनी

दिल्ली: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले की रहने वाली, पुलिस अफसर श्रेष्ठा ठाकुर का वीडियो हो सकता है आपने कभी न कभी जरूर देखा हो. अगर नहीं देखा, तो हम आपको उनके बारे में बताते हैं. इनके बारे में एक बात और भी मशहूर है. लोग उन्हें लेडी सिंघम भी बुलाते हैं.

दोस्तों श्रेष्ठा ठाकुर, एक दिन अपने साथियों के साथ यातायात सुविधा को देख रही थीं. कोई आमजन यातायात के नियमों का उल्लंघन न करे, और यातायात व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे इसके लिए उनकी टीम लोगों का चालान बना रही थी. बस यहीं से इनके लेडी सिंघम बनने की कहानी चालू हो जाती है. आइये आपको बताते हैं, कैसे.

सोशल मीडिया में वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद से उन्हें लेडी सिंघम बुलाने लगे

Shreshtha Thakur

श्रेष्ठा एक जगह खड़ी हुईं थीं, तब उस दौरान कुछ बीजेपी कार्यकर्ता बाइक पर आए और वे लोग वहां से निकल रहे थे. तभी टीम ने उनको हाथ देकर रोका. उन लोगों पर हेलमेट नहीं था, इस वजह से श्रेष्ठा ठाकुर ने उन लोगों का चालान बना दिया. आपको बता दें, कि यह मामला अभी का नहीं है 2020 का है.

इसके बाद वह बीजेपी कार्यकर्ता इनसे बहस करने लगे, और फोन करके अपने साथियों को भी उन्होंने उस जगह पर बुला लिया जहां उनका चालान बना था. इसके बाद वहाँ, कुछ छूट भैया नेता आए और उन्होंने इस लेडी सिंघम श्रेष्ठा ठाकुर को अपनी नेतागिरी दिखाना शुरू कर दी.

उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं को समझाने की कोशिश की थी

श्रेष्ठा ठाकुर ने उन लोगों को समझाने की कोशिश की के एक तो आपने नियम तोड़ा है, उपर से बदतमीजी कर रहे हैं. उन्होंने उस नेता और उनके साथ के कार्यकर्ताओं को समझाने की कोशिश भी की, के आपके इस तरह के बर्ताव से आपकी ही पार्टी का नाम खराब हो रहा है.

और जब ये सब, झोलाछाप नेता अपनी मनमानी पर उतारू हो गए, तब उन्होंने सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने के आरोप में, उनके 5 कार्यकर्ताओं को चालान बनाकर जेल भेज दिया. इसके बाद वही हुआ जैसा कि लोगों द्वारा अनुमान लगाया जा रहा था, श्रेष्ठा ठाकुर का उसी दिन बहराइच ट्रांसफर हो गया.

ट्रांसफर होने से अपने फर्ज को निभाना थोड़ी छोड़ देंगे

श्रेष्ठा ठाकुर ने अपने ट्रांसफर होने के बाद, बड़ी ही निड’रता से अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा कि ‘जहां भी जाएगा रोशनी लायेगा, किसी चिराग का अपना मकान नहीं होता’ बहराइच ट्रांसफर हुआ है दोस्तों यह नेपाल का बॉर्डर है. चिं’ता मत करिए मैं खुश हूं यह मेरे अच्छे काम का इनाम है, और यह मुझे मंजूर है, आप सभी बहराइच पधारें.

दरअसल श्रेष्ठा ठाकुर एक बिजनेस परिवार से ताल्लुक रखने वाली पुलिस अधिकारी हैं. उन्होंने कानपुर से एमबीए किया और साल 2012 में पीसीएस एग्जाम पास की है. यह एक पुलिस सर्विसेज से जुडी सेवा की नौकरी है.

अपने एक इंटरव्यू के दौरान श्रेष्ठा ठाकुर ने कहा था कि, मेरा मानना है कि वर्दी में एक महिला पूरी तरह से सुरक्षित होती है. उन्होंने कहा कि जब कोई महिला यूनिफॉर्म में होती है तो उसको एक अलग ही तरह का अनुभव महसूस होता है.

स्कूल के समय से ही इच्छा थी पुलिस में जाने की

वे बताती हैं कि, जब वह स्कूल में भी थीं तो उस दौरान भी वे वहां कुछ भी गलत बर्दाश्त नहीं करती थीं. उनकी इच्छा थी कि वह पुलिस फोर्स को जॉइन करें और हुआ भी यही. हालांकि उनके भाई मनीष प्रताप रेलवे में आईएएस अधिकारी रहे हैं.

श्रेष्ठा अपने भाई को अपना रोल मॉडल मानते हैं, और उन्हें अपने कैरियर में आगे बढ़ने के लिए उनसे ही प्रेरणा मिली है.
लेडी सिंग्हम को लोगों के बीच जाकर काम करना बहुत पसंद है, और उनकी इसी वजह से वह आम जनता के बीच काफी लोकप्रिय हुई हैं.

वे जहां भी जाती हैं, थोड़े ही समय में फेमस हो जाती हैं. और सिर्फ उनके द्वारा किए गए सोशल वर्क, चैरिटी का काम करना जैसे कि किसी मददगार की मदद करना, ज़रूरतमंद को खाना देना, कपड़ा थोड़ा बहुत पैसे से मदद करना इन जैसे कामों की वजह से वो बहुत चर्चा में रहती हैं.

इसके अलावा श्रेष्ठा ठाकुर नई उम्र की लड़कियों को आत्मरक्षा का हुनर भी सिखाती हैं. तो ऐसे ही कुछ और कामों की वजह से वह लोगों की चहेती हैं, इनके बारे में आपको और ज्यादा पता उनके सोशल अकाउंट पर जाकर लग जाएगा.

दिल्ली (नोएडा) के रहने वाले ज़ुबैर शैख़, पिछले 10 वर्षों से भारतीय राजनीती पर स्वतंत्र पत्रकार और लेखक के तौर पर कई न्यूज़ पोर्टल और दैनिक अख़बारों के लिए कार्य करते हैं।