ये बेशर्म हैं, मुंबई के बारे में कुछ नहीं जानते, वरिष्ठ पत्रकार ने रजत शर्मा पर किया तीखा ह’मला

नई दिल्ली: दुनिया कोरोना वायरस की म’हामा’री झेल रहे हैं. दुनिया भर में लाखों लोग इस म’हामा’री का शिकार हो चुके हैं. तो वही 1,08,800 से अधिक लोगों की मौ’त हो चुकी है. हलाकि यह वक्त है जब सभी लोगों को सारे मतभेदों भुलाकर एकजुट होकर मुस्तैदी से इस बीमारी से लड़ने की लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इसके बहाने लगातार सा’म्प्रदा’यिकता को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं।

दरअसल देश में जारी लॉकडाउन के बीच घर लौटने के लिए मंगलवार को हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर अचानक मुंबई के बांद्रा में जमा हो गए. इसके बाद भी’ड़ को ति’तर बि’तर करने के लिए पुलिस ने ला’ठीचा’र्ज किया. इन मजदूरों की मांग थी कि उन्हें उनके घर वापस भेजा जाए. बांद्रा में जमा हुई भी’ड़ को लेकर लगातार लोगों के रिएक्शन आ रहे हैं. तो ऐसे इंडिया टीवी के एडिटर इन चीफ रजत शर्मा सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आए गए हैं।

आपको बता दें इंडिया टीवी के एडिटर इन चीफ रजत शर्मा ने मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देशव्यापी लॉकडाउन 3 मई तक बढ़ाए जाने के बाद मुंबई के बांद्रा पश्चिम स्टेशन के बाहर इकट्ठा हुए प्रवासी मजदूरों से जुड़ा ट्वीट किया। ट्वीट में उन्होंने लिखा, बांद्रा में जामा मस्जिद के बाहर इतनी बड़ी संख्या में लोगों का इकट्ठा होना चिंता की बात है। इन्हें किसने बुलाया? अगर ये लोग घर वापस जाने के लिए ट्रेन पकड़ने के लिए आए थे तो उनके हाथों में सामान क्यों नहीं है।

इसके बाद उनके इस ट्वीट पर तमाम लोगो ने तीखी प्रतिक्रिया देना चालू कर दी। इन्ही में एक पत्रकार निखिल वागले है जिन्होंने रजत शर्मा के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए कहा, ‘आप बडे बेशर्म हैं। एक तो मुंबई के बारे मे कुछ नही जानते और कोशिश कर रहे हैं सां’प्रदायि’क रंग देने की। इस मस्जिद के सामने बांद्रा स्टेशन है और ये लोग वहां टिकट लेने आए थे। आप जैसे किसी घटिया चैनल ने ट्रेन शुरू होने की अफवा उडाई थी। बस?

वही पत्रकार रजत शर्मा के ट्वीट पर अन्य यूजर्स ने भी जमकर प्रतिक्रिया दी है। ट्विटर यूजर सुरेश @SureshShroff1 लिखते हैं, क्योंकि मस्जिद ही उनका स्टेशन था उनको मस्जिद ही जाना था मस्जिद में ही उनको बुलाया गया था। ब्रिंग इट ऑन @TigersBloodCell ट्वीट कर लिखते हैं, सूरत का वीडियो नहीं दिखाएंगे।

इसी तरह बीए @bobbyfaith लिखते हैं, वागले जी इस बात का भी जवाब दीजिए कि उनके हाथ में कोई सामान क्यों नहीं था। कुशाल @kaushal365 लिखते हैं, ये सारे भेड़िए खाल उतार चुके हैं, अब खुल के आ गए हैं नफरत की रोटी सेकने के लिए। रविश कुमार (Parody) @Ravishk356 लिखते हैं, धर्म के नाम पर मत बांटो रजत शर्मा, वो भी’ड़ स्टेशन पर एकत्रित हुई है।

इसी तरह खलील सलमानी @khalidsalmani1 लिखते हैं, ‘मरकज, मस्जिद, मुसलमान के अलावा और कुछ भी दिखता है शर्मा अंकल ?? कुछ दिन पहले दिल्ली बस स्टैंड में और 3 दिन पहले गुजरात मे भी मजदूर यूं सड़कों पर आए थे। वो क्यों आए सड़कों पर उनको किसने बुलाया था। वहां कौन सी मस्जिद थी?

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