लॉकडाउन में सैलरी पर मोदी सरकार का यूटर्न, पहले दिया था पूरे वेतन का आदेश अब SC में कहा….

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने फैसले पर यू-टर्न ले लिया है. लॉकडाउन लागू करने के साथ ही मोदी सरकार ने निजी कंपनियों को कर्मचारियों को पूरी सैलरी देने के आदेश जारी किये थे. लेकिन इस मामले को लेकर मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समझ यू-टर्न मार लिया है. केंद्र सरकार ने अब सुप्रीम कोर्ट में एकदम अलग ही रुख अपनाया है जिससे हर कोई हैरान है.

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा है कि यह कंपनी और कर्मचारी के बीच का मसला है. इतना ही नहीं सरकार ने तो यह भी कहा कि हम इसमें दखल नहीं देंगे. वहीं इससे पहले 29 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक आदेश जारी किया था. जिसमें कहा गया था कि लॉकडाउन की अवधि के दौरान कंपनियों को अपने कर्मचारियों को पूरी सैलरी देना होगा.

इतना ही नहीं सरकार ने कंपनियों को ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ एक्शन लेने की चेतावनी भी दी थी. पिछले दिनों सरकार के इसी आदेश के खिलाफ एक याचिका दायर की गई थी. जिस पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी.

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि सरकार आखिर कंपनियों से लगातार कितने दिन बिना काम के पूरी सैलरी देने की उम्मीद रखती है. अब जस्टिस अशोक भूषण की अगुवाई वाली बेंच ने इस मामले में कहा है कि 54 दिनों पुरे कर चुके लॉकडाउन के दौरान की सैलरी को लेकर कर्मचारियों और कंपनियों के बीच कोई सहमति बननी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी लॉकडाउन के दौरान कंपनियों को सैलरी के भुगतान करने के आदेश देने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान कही. इसी दौरान सरकार ने कोर्ट ने कहा कि आपका यह पक्ष रहा है कि कर्मचारियों को लॉकडाउन के दौरान भी सैलरी का पूरा भुगतान किया जाना चाहिए.

ऐसे में अब सरकार को ही इस मसले को हल करने के लिए प्रयास करने होगे. बेंच में सम्मिलित जस्टिस संजय किशन कौल ने तीखी टिप्पणी करते हुए केंद्र की मोदी सरकार से कहा कि आप कर्मचारियों की जेब में पैसे डालने का प्यास करते रहे हैं तो ऐसे में अब सरकार को ही इसके लिए समाधान निकलना होगा.

आपको बता दें कि लॉकडाउन लागू होने की घोषणा के साथ ही नरेंद्र मोदी ने अपने राष्ट्र के नाम दिये गए संबोधन में सभी कंपिनयों से अपील की थी कि वह इस दौरान अपने कर्मचारियों की सैलरी में कटैौती नहीं करें और उन्हें पूरी सैलरी दे. जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसे लेकर आदेश भी जारी किया था.