लॉकडाउन से जुड़े सवालों पर मोदी सरकार द्वारा दिए गए ये जवाब सुनकर हैरत में पड़ जायेंगे आप

लॉकडाउन से जुड़े सवालों पर मोदी सरकार द्वारा दिए गए ये जवाब सुनकर हैरत में पड़ जायेंगे आप

संसद का मानसून सत्र 4 सितंबर से चल रहा है. इस बार खूब हंगामा भी हो रहा है, इस दौरान विपक्ष ने एक सप्ताह में कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे जिसमें से कई के जवाब नहीं मिले और कई सवालों के जवाब सरकार ने दे दिए है. लेकिन सरकार की तरफ से मिले असंतोष जनक जवाब को लेकर भी देशभर में बा;वल क’ट रहा हैं. सोशल मीडिया से लेकर विपक्ष तक हर कोई सरकार को निशा;ने पर लेता नजर आ रहा है. नजर डालते हैं ऐसे ही कुछ सवालों पर-

किसानों की आ#त्मह#त्या को लेकर जानकारी हैं? नहीं

राज्यसभा में सांसद पीएल पूनिया ने 21 सितंबर को गृह मंत्रालय से सवाल किया कि क्या नेशनल क्राइम रेकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने किसानों की आ#त्मह#त्या के कारणों की डि’टेल्स निकालने का काम बंद कर दिया हैं?

इसके जवाब में गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि NCRB ने कई बार राज्यों से किसानों और खेतिहर मजदूरों की आ#त्मह#त्या की जानकारी मांगी लेकिन उन्होंने शून्य आंकड़े दिए.

 

उन्होंने आगे बताया कि राज्यों की तरफ से अन्य पेशे के लोगों के सु’सा”इड के आंकड़ें तो बताए गए लेकिन किसान और खेतिहर मजदूरों के बारे में नहीं बताया गया. इसी के चलते कृषि क्षेत्र में सुसा’इड की संख्या और कारण साफ नहीं होने के कारण आंकड़े प्रकाशित नहीं किए गए.

लॉकडाउन के दौरान कितने प्रवासी मजदूरों की मौ#त हुई? डेटा नहीं

14 सितंबर को केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने लोकसभा में लिखित जवाब में कहा कि केंद्र के पास प्रवासी मज़दूरों की मौ#त का आंकड़ा मौजूद नहीं है. हालांकि केंद्र के पास लॉकडाउन के चलते कितने प्रवासी मजदूर अपने घर लौटे, इसके राज्यवार आंकड़े उपलब्ध हैं. वहीं मौ#त के बाद पी’ड़ित परिवार को मुआवजे के सवाल पर कहा गया कि जब मौ#त के आंकड़े ही नहीं हैं, तो मुआवजे का तो सवाल ही नहीं उठता है.

कोरोना के चलते कितने हेल्थ’वर्क’र्स ने गंवाई जा#न? केंद्र अनजान

15 सितंबर को राज्यसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि उनके पास हेल्थकेयर स्टाफ यानी डॉक्टर, नर्स, सपोर्ट स्टाफ और आशा वर्कर्स में जो कोरोना से संक्र’मि’त होने वाले या जिनकी मौ#त हो गई हैं उनका कोई केंद्रीय स्तर पर आंकड़ा मौजूद नहीं है, ये राज्य की जिम्मेदारी है. हालांकि सरकार के पास पीएम गरीब कल्याण बीमा पैकेज के तहत राहत पाने वालों का रिकॉर्ड है.

वहीं IMA यानी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने सरकार की आलोचना करते हुए मीडिया को बताया कि 2238 डॉक्टर्स कोरोना से सं’क्र’मि’त हुए और 382 की कोरोना के चलते मौ#त हो गई.

देशभर में कितने प्लाज़्मा बैंकों? जवाब वहीं पता नहीं

स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्वि’नी चौबे ने एक सवाल के जवाब में कहा कि देशभर में कोरोना मरीजों को प्ला’ज़्मा थेरे’पी देने के लिए कितने प्लाज्मा बैंक संचालित किये जा रहे है, इसकी जानकारी उनके पास नहीं है. ऐसे बैंकों की स्थापना के लिए राज्यों ने पहल की हैं, केंद्र को इन बैंक की संख्या की जनकारी नहीं है.

कोविड-19 से कितने सफाई कर्मचारियों की हुई मौ#त, पता नहीं

16 सितंबर को सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय से राज्यसभा में पूछा गया कि कोविड 19 के चलते कितने कितने सफाई कर्मचारियों की मौ#त हॉस्पिटल में सफाई और सुरक्षा की क’मी के चलते हुई. क्या इसका कोई डाटा हैं? इस पर केंद्र ने कहा कि हॉस्पिटल एंड डिस्पेंसरी राज्य का विषय है. केंद्र की तरफ से कोरोना म’हामा’री के दौरान म’रने वाले सफाई कर्मचारियों का कोई डेटा तैयार नहीं किया गया.

कितने राजनेता जे’ल में हैं? केंद्र को यह भी पता नहीं

16 सितंबर को राज्यसभा में CPI के सांसद बिनॉय विश्वम ने सरकार से पूछा कि कितने नेता जे’ल में मौजूद है, क्या सरकार के पास कोई आंकड़ा है? इस पर सरकार ने कहा कि यह जानकारी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने तैयार नहीं की हैं.

कोरोनाका’ल में कितने छोटे उद्योग बंद हुए? हमें नहीं पता

राज्यसभा में केंद्र सरकार ने कहा कि कोरोना काल के दौरान लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs फर्म) में कितनी नौकरियां गई. इसका आंकड़ा सरकार के पास नहीं है. इसे लेकर सरकार ने कोई स्टडी नहीं की है और ना ही कोरोना का इन उद्योगों पर पड़ने वाले प्रभाव की सरकार को कोई जानकारी हैं.

कोरोना से म#रने वाले पुलिसकर्मियों का डेटा? केंद्र नहीं जानता

गृह मंत्रालय से 15 सितंबर को देश में कोरोना वायरल के चलते जा#न गंवा’ने वाले पुलिसकर्मियों का आंकड़ा मांग गया, जिस पर सरकार ने कहा कि उसके पास ऐसा कोई डेटा नहीं है. हालांकि सरकार ने BSF, CRPF, CISF, ITBP, SSB, NSG, ARs जैसे सुरक्षा बलों के जवानों की मौ#त का डेटा जरुर बताया.

साभार- लल्लनटॉप