बड़ी खबर: कांग्रेस के दावों से बीजेपी खेमे में हड़कंप, एमपी में फिर से पलट सकती है सरकार

भोपाल: मध्य प्रदेश में पिछले काफी समय से गुटबाजी जगजाहिर है. जब एक ओर कोरोना जैसी महा’मा’री से निपटने की तैयारी करनी चाहिए थी, तब राज्य में सरकार गिराने और बनाने की कवायद चल रही थी. मप्र की सीमा पर कोरोना प्रतिरोध के कोई प्रभावी इंतजामात नहीं किए हैं. वही केंद्र की बीजेपी सरकार को मप्र के हालात को गंभीरता से लेना चाहिए था लेकिन वो सब सरकार गिराने और बनाने में लगे हुए थे।

अब प्रदेश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच एमपी में सियासी पारा भी चढ़ने लगा है. कांग्रेस प्रदेश की बीजेपी सरकार पर आरोप लगा रही है कि शिवराज सरकार ने कोरोना से निपटने की तैयारी नहीं की है. जबकि शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पूर्व की सरकार ने कोई काम नहीं किया। इस बात को लेकर शिवराज सरकार की पूरे देश में काफी फजीहत हुई अब एक बार फिर से वही सिलसिला शुरू होता दिख रहा है।

उपचुनाव में स्पष्ट हो जाएगा कि जनता किसे चाहती है.

दरअसल, मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन कार्यालय से बुधवार को 24 विधानसभा सीटों पर उप चुनाव की तयारी को लेकर कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारीयों को पत्र जारी हुआ है. इस पत्र में 15 जिलों के नाम हैं जहां चुनाव होने हैं. हालांकि, यह चुनाव आम दिनों के हिसाब से जून में होने थें, लेकिन कोरोना महा’मा’री के चलते फ़िलहाल इसकी तारिख तये नहीं की गई है।

उधर, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दावा किया है कि उप चुनाव के बाद राज्य में भाजपा की सरकार नहीं बचेगी उप चुनाव में कांग्रेस 24 सीटों पर जीत दर्ज कर फिर से सत्ता में वापसी करेगी कमलनाथ ने इन उपचुनावों के बाद मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार के गिरने का दावा करते हुए कहा, जीतना तो छोड़िए, इनको उपचुनाव में मुंहतोड़ जवाब मिलेगा।

कांग्रेस के दावों से बीजेपी खेमे में हड़कंप

उन्होंने कहा की मुझे पूरा विश्वास है कि जो ये 22 उपचुनाव हैं, आज इनका क्या हाल होगा, सोशल मीडिया देखिये आप गांवों में जाकर पता कीजिए कि इनके बारे में क्या कहा जा रहा है. उपचुनाव में स्पष्ट हो जाएगा कि जनता किसे चाहती है।

वही कांग्रेस की ओर से किये जा रहे दावों से बीजेपी खेमे में भी ह’ड़कंप मचा हुआ है. मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जनता ने कांग्रेस को सत्ता सौंपी थी। जाहिरसी बात है, जनता के फैसले के विरुद्ध सरकार बनाने वाली बीजेपी पार्टी को एक बार फिर से जनता के फैसले से डरना लाज़मी है।

सूत्रों की माने तो शिवराज सरकार कोरोना महा’मा’री से ज्यादा इस सियासी खत’रे से निपटने के लिए अभी से कमर कस रही है. वहीं कांग्रेस भी सरकार को घेरने में किसी तरह का मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहती।

गौरतलब है कि, ज्योतिरादित्य सिंधिया की अपनी ही कांग्रेस सरकार से बगावत के बाद उनके खेमे के 22 विधायक बीजेपी से जा मिले थे जिसकी वजह से केवल 15 महीनों में कमलनाथ सरकार को गिराकर शिवराज सिंह चौहान ने फिर से प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए थे।