बड़ी खबर: मद्रास हाईकोर्ट ने CAA का विरोध प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ दायर एफआईआर रद्द की..

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के महत्वकांक्षी बिल नागरिक संशोधन अधिनियम 2019 (CAA) को लेकर विरोध प्रदर्शन करने वालों को मद्रास उच्च न्यायालय ने बड़ी राहत दी हैं. मद्रास उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ दायर की गई एफ़आईआर को रद्द कर दिया हैं. आपको बता दें कि इस सीएए का विरोध करने वालों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे जिसे कोर्ट ने रद्द करने का आदेश दिया है.

इस मामले को लेकर लाइव लॉ ने बताया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 143 और 188 के तहत शम्सुल हुदा बकवी पर सार्वजनिक सड़क पर बिना अनुमति लिए सीएए का विरोध करने के आरोप लगे थे. जिसके बाद उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया था.

उन्होने अपनी याचिका में कहा कि भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 195 (1) (ए) के मुताबिक कोई भी कोर्ट आईपीसी की धारा 188 के तहत अ’परा’ध का संज्ञान नहीं ले सकती हैं, जब तक कि लोक सेवक के पास प्राधिकरण से लिखित आदेश प्राप्त ना हुआ हो.

फाइलों का अवलोकन करते हुए न्यायमूर्ति जी के इलानथिरियन ने टिप्पणी की कि अपराध के लिए पुलिस ने पहली सुचना रिपोर्ट आईपीसी की धारा 143 और 188 के तहत दर्ज की हैं.

कोर्ट ने कहा कि जीवनानंदम और अन्य बनाम राज्य मामले में यह माना गया कि एक पुलिस अधिकारी को IPC की धारा 172 से 188 के तहत आने वाले किसी भी अपराध के लिए प्राथमिकी दर्ज करने का अधिकार प्राप्त नहीं हैं.

अपने आदेश में हाईकोर्ट ने बेंच ने कहा कि पुलिस अधिकारी आईपीसी की धारा 188 के अन्दर अप’रा’धों के लिए FIR दायर करने के लिए एक सक्षम व्यक्ति नहीं है. कोर्ट ने कहा कि इसी तरह पहली सूचना रिपोर्ट या अंतिम रिपोर्ट IPC कि धारा 188 के तहत अप’रा’धों के लिए रद्द करने के लिए अधीन आई जाती हैं.

शिकायत ने यह भी कहा गया है कि याचिकाकर्ता और अन्य लोगों द्वारा सीएए के खिलाफ किया गया विरोध एक गैरकानूनी विरोध है और इसी आईपीसी की धारा 143 की जरूरतों को पूरा नहीं करता हैं. इसी के चलते इस मामले में अंतिम रिपोर्ट को बरकरार नहीं रखा जा सकता है, इसलिए इसे ख़ारिज किया जाता है.