मानसून से पहले अगर कोरोना पर नहीं किया गया काबू तो हो सकता है बुरा हाल, डराती है ये रिपोर्ट

देश भर में कोरोना सं’क’ट छाया हुआ है. कोरोना सं’क’ट के बादल हटते हुए नजर नहीं आ रहे है. देश भर में तेजी से कोरोना मामलों में इजाफा हो रहा है. तेजी से बढ़ते मामलों के बीच अब विशेषकों द्वारा एक और चिंता जाहिर की गई है. जानकारों ने चेतावनी दी है कि अगर मानसून से पहले कोरोना पर काबू नहीं पाया जाता है तो हालात और भी ज्यादा बिगड़ सकते है. जानकारों का कहना है कि मानसून के दौरान यह स्थिति और भी ज्यादा भयावक हो सकती हैं.

इसके पीछे की वजह विशेषज्ञों द्वारा तापमान को बताया है. इसके लिए विशेषज्ञों द्वारा तापमान का एक कनेक्शन ढूंढ़ा है. सिडनी यूनिवर्सिटी और शंघाई की फूडान यूनिवर्सिटी ऑफ पब्लिक हेल्थ की संयुक्त रिसर्च में यह बात सामने आई है कि कोरोना वायरस आने वाले समय में और भी ज्‍यादा खतरनाक साबित हो सकता हैं.

रिसर्च के अनुसार मानसून के दौरान भारत में कोरोना के मामले और भी तेजी से बढ़ सकते हैं. रिसर्च में कहा गया है कि पृथ्वी के उत्तरी गोलार्द्ध वाले हिस्से में जैसे ही नमी कम होना शुरू होती है जो वहां ज्यादा सतर्कता रखती होगी.

रिसर्च में उत्तरी गोलार्द्ध में बारिश, नमी और जनवरी से मार्च के तापमान के आंकड़े जुटा कर उन पर अध्ययन किया गया है.  इसके आलावा मरीजों की संख्या, मौसम और संक्रमण के अन्य पैरामीटर्स को ध्यान में रखते हुए अध्ययन किया गया जिसमें पाया गया कि वायरस फैसले में नमी एक अहम किरदार निभाती हैं.

ट्रांसबाउंड्री और इमर्जिंग डिसिसेज़ जर्नल में प्रकाशित किये गए एक शोध के अनुसार कोरोना महामारी चीन, यूरोप, उत्तरी अमेरिका जैसे क्षेत्रों में सर्दियों के दिनों में तेजी से फैली थी. प्रोफेसर माइकल कहते हैं इन इलाकों में सर्दियों के दौरान बहुत कम नमी वाला तापमान मौजूद होता हैं.

शोधकर्ताओं का तर्क है कि जब नमी घटती है और हवा शुष्क होती है तब इस वायरस के कण और भी ज्यादा बारीक हो जाते हैं. जिसके चलते किसी के छींकने या खांसने पर कोरोना वायरस के कण हवा में लम्बे समय में टिके पाते हैं. जो स्वस्थ लोगों में संक्रमण का खत’रा बनते हैं.

वहीं जब हवा में नमी बढ़ती है तो इसके कण बड़े और भारी होने के चलते नीचे गिर जाते हैं. सिडनी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर माइकल वार्ड के अनुसार कोविड-19 सर्दियों की मौसमी बीमारी बन सकती है. यह ध्यान में रखना होगा कि अगर सर्दी में इसके लक्ष्ण दिखाई देते है तो अलर्ट होने की जरूरत हैं.

आपको बता दें कि इससे पहले कहा जा रहा था कि गर्मी के मौसम के दौरान कोरोना कम हो सकता है लेकिन ऐसा देखने में नहीं आया हैं. बता दें कि जब से दुनिया में कोरोना वायरस ने दस्तक दी है तभी से बड़ी तादाद में वैज्ञानिक इस पर रिसर्च कर रहे हैं. लेकिन अभी तक किसी भी ठोस और एकमत नतीजे पर नहीं पहुंच सके हैं.