पैसों के बदले आतं’कियों को ठिकाना देने वाले DSP का बड़ा खुलासा, वापिस लिया जा सकता है वीरता पुरस्कार

हाल ही में अभी जम्मू कश्मीर से एक बहुत बड़ा, सनसनीखेज मामला सामने आया था। सुरक्षाबलों के द्वारा जम्मू- कश्मीर के कुलगाम में शनिवार को चेकिंग के दौरान हिज’बुल मुजाहि’द्दीन के दो आतं’कियों के साथ जम्मू कश्मीर राज्य के डीएसपी देविंदर सिंह को पकड़ा गया था। जो एक प्रवासी कार्यक’र्ता की ह’त्या करने के फिराक में था। आपको बता दें कि दविंदर सिंह जम्मू कश्मीर पुलिस के एक डीएसपी हैं।

डीएसपी देविंदर दो दशकों तक, घाटी में चरमपंथियों के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान प्रमुख पुलिस कर्मी के रूप में तैनात रहा था. उन्हें अपने कामों के लिए भारत सरकार द्वारा वीरता पदक से भी नवाजा गया है। शुरूआती जांच में यही पता चलता है कि वो उग्र’वादियों के लिए एक वाहक के रूप में काम कर रहा था।

Devendra Singh DSP of Jammu Kashmir

वर्दी में देश का गद्दा’र छुपा हुआ था, इत्तेफाक़ से पकड़ में आया

इसके अलावा वो ऐसा पैसे के लिए भी किया करता था। इस मामले को संसद हमले के दो’षी अफजल गुरू के द्वारा 2004 में तिहाड़ जेल से अपने वकील सुशील कुमार को लिखा गया पत्र विशेष रूप से गंभी’र बना रहा है।

इस पत्र में दावा किया गाय किया गया था कि देविंदर सिंह ने मुझे विदेशी चर’मपंथियों को दिल्ली से जाने और वहां उन्हें किराए के मकान और कार दिलाने के लिए मजबूर किया।

सिंह ने बाद में गुरू को प्रता’ड़ित करने की बात स्वीकार किया। डीएसपी के अलावा पकड़े गए दो आतं’कवादी जो कथित तौर पर दिल्ली में गणतंत्र दिवस के मौके पर किसी आतं’की हम’ले को अंजाम देने की फिराक में थे।

उर्दू नाम न होने की वजह से भांड मीडिया ने चुप्पी साधी

अगर यही DSP कोई देवेंदर सिंह न होकर, उर्दू नाम वाला कोई दानिश होता तो अब तक हमारे देश के मीडिया का एक बड़ा तबका अपनी छा’ती पीट-पीटकर गरियाने में लगा होता. मगर इतनी बड़ी खबर होने के बावजूद भी कुछ नही हुआ.

पिछले दो दिनों में देश के कुछ राष्ट्रवादी एंकरों ने इस कहानी को पूरी तरीके से नजरअंदाज कर दिया है। टाइम्स नाउ जामिया विरोध के बारे में बात करने में व्यस्त रहे।

तो वहीं इंडिया टुडे पर रिपोर्ट में कहा गया कि खुफिया एजेंसियां गिरफ्तार डीएसपी से पूछताछ करेंगी।

तो दूसरी तरफ जी न्यूज, एबीपी दोनों ही पहले से ही महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रही है। इसके अलावा अब तक कोई भी राष्टवादी समाचार चैनल ने इस आतं’की हमले को अंजाम देने की कोशिश पर भी बहस नहीं की है.

गिरफ्तार डीएसपी देवेंदर सिंह से वीरता पुरस्कार वापस लिया जा सकता है

आपको बता दें कि आतं’कियों के साथ गिरफ्तार डीएसपी देवेंद्र सिंह से, उसका वीरता पुरस्कार वापस लिया जा सकता है.

भास्कर डॉट कॉम के मुताबिक बताया जाता है कि डीएसपी देवेंद्र सिंह पर किसी आतं’की के तौर पर ही केस दर्ज होगा, तथा उसके साथ वैसा ही सुलूक किया जाएगा जो आतं’कियों के साथ किया जाता है.

मीडिया में खबरों के अनुसार उसने आतं’कियों से 12 लाख रुपए लिए थे, और इस डील के तहत उसको उनको दिल्ली की सरहद में अंदर पहुंचाना था.

दरअसल यह डीएसपी आसिफ अहमद और नवीद नाम के दोनों आतं’कियों को कुछ महीनों के लिए चंडीगढ़ में ठिकाना मुहैया कराने के लिए ले जा रहा था. इसके अलावा डीएसपी के घर से लाखों रुपए भी बरामद किए गए हैं.