VIDEO: केजरीवाल के दावों की खुली पोल, दाने दाने तो तरस रहे हैं लोग, भूख से बिलख रही महिला को सुनिए

देशभर में जारी कोरोना कहर के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने देशव्यापी लॉकडाउन की अवधि को 3 मई तक बढ़ाने का फैसला लिया है. कोरोना वायरस लॉकडाउन के 21वें दिन आज मंगलवार को सुबह 10 बजे पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए देश में 3 मई तक लॉकडाउन जारी रहेगा। हालांकि, 24 मार्च को 21 दिन के देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की घोषणा के बाद देश भर कई ज़िलों में फ़ंसे लाखों प्रवासी मज़दूरों की तकलीफें बढ़ गई है।

देशव्यापी लॉकडाउन के बाद जहां-तहां फ़ंसे सैकड़ों मज़दूरों को दिन में बड़ी मुश्किल से बस एक वक़्त का खाना नसीब हो पाए तो बड़ी बात है. इनका कहना है कि कोरोना का तो पता नहीं लेकिन भूख से जरूर मा’र जाएंगे. ऐसी कहानी एक मजदुर की नहीं बल्कि देश भर में फसे लाखों प्रवासी मजदूरु की है।

इन्ही में से एक महक नाम की महिला जिसने हाल ही में एक बेटी को जन्म दिया है. न तो अस्पताल जाने के पैसे थे और न कोई साधन, 22 साल की महक और उनके पति गोपाल उत्तराखंड के नैनीताल के एक गांव के रहने वाले हैं।

महिला का पति गोपाल जो पुरानी दिल्ली के टाउनहॉल इलाक़े की एक बिल्डिंग में मज़दूरी करता हैं. लेकिन अब लॉकडाउन के चलते सब कुछ बंद है. महक बताती हैं दो दिन में बस एक बार ही बड़ी मुश्किल से खाना नसीब हो पता है. वही अपनी बेटी को देख पिता गोपाल के आंसू नहीं रूकते. महक ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, बस एक मुट्ठी चावल खाया है.. दूध भी नहीं उतर रहा है.. बेटी को कैसे पिलाऊं..

 

एनडीटीवी की खबर के अनुसार ये कहानी सिर्फ़ महक की ही नहीं है पास में खड़ी बिहार के नवादा की रहने वाली चांद रानी भी नंगे पैर अपनी झोपड़ी दिखाने लगती हैं. अंदर बस थोड़ा सा चावल है जिससे उन्हें अपने चार छोटे बच्चों को खिलाना है. चूल्हा ठंडा पड़ा है क्योंकि पकाने को अनाज ही नहीं है।

चांद रानी करनाल, हरियाणा, के भ’ठ्ठे में अपनी पति मदन के साथ मज़दूरी करती थीं. पैदल चल कर किसी तरह दिल्ली तक पहुंची और तब से यही इनका आशियाना बन गया है. चांद रानी ने बताया, ये चावल है यही खिलाएंगे और सूखी पूड़ियां हैं कुछ नहीं मिलता तो बच्चों को पानी के साथ ये पूड़िया खिला देते हैं।

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