सीमा पर तैनात 90,000 जवानों को मोदी सरकार ने दिया झटका, जनवरी और फरवरी का वेतन…

नई दिल्लीः देश में आर्थिक मंदी का असर क्या अब सीमा पर तैनात जवानों पर भी पड़ने लगा है। मोदी सरकार जवान-जवान करते हुए अब उन्हीं को सुविधाएं देने में नाकाम होने लगी है। सेना और जवानों को लेकर सबसे ज्यादा राजनीति करने वाली भाजपा सरकार देश में जब भी कोई चुनाव आता है तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह जवानों का राग अलापने लगते हैं।

खबर है कि सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल के करीब 90,000 जवानो को केंद्र सरकार की तरफ से जनवरी और फरवरी के वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। द टेलीग्राफ में छपी खबर के अनुसार सैन्य कर्मियों को मिलने वाले चाइल्ड एजुकेशन भत्ता का भी भुगतान नहीं किया गया है। भत्तों का भुगतान नहीं किया जाना सरकार के पास फंड की कमी बताया जा रहा है।

मोदी सरकार के पास 90,000 जवानों को वेतन देने के पैसे नहीं

आपको बता दें सशस्त्र बल ने मोदी सरकार से कह दिया है कि उनके पास दो महीने का वेतन देने के लिए भी पैसे नहीं है। ये साफ़ तौर पर मंदी का असर है जो अब सेना के जवानों के ऊपर भी दिखाई देने लगा है। लेकिन मोदी सरकार ये मानने को तैयार ही नहीं है कि देश में मंदी है।

गौरतलब है की पिछले चार महीने में यह दूसरा मौका है जब अद्धसैनिक बलों के कर्मियों के भत्तों का भुगतान रोक दिया गया है। पिछले साल सितंबर में सीआरपीएफ के 3 लाख जवानों का 3600 रुपये का राशन भत्ता रोक दिया गया था। इसकी वजह थी कि गृह मंत्रालय ने फंड की कमी को लेकर भेजे गए तीन रिमाइंडर को इग्नोर कर दिया था।

लेकिन अब अगले ही महीने फरवरी में देश का आम बजट भी आने वाला है। और ये बजट ठीक ऐसे समय में आ रहा है जब जवानों को वेनत नहीं मिलना ये जवानों का मनोबल तोड़ सकता है। क्योंकि जवान सीमा पर विपरीत परिस्थितियों में अपनी ड्यूटी कर रहे हैं।

बता दें सशस्त्र बल के कर्मचारियों के जो भत्ते रोके गए हैं उसमें सभी तरह के भत्ते शामिल हैं। जिसमें बच्चों की पढाई, लीव कांशेसन आदि भत्ते शामिल हैं। बता दें कि एसएसबी भूटान-नेपाल से सटी भारत की 2450 किलोमीटर सीमा की रक्षा करते हैं।