केंद्र की सत्ता पर नियंत्रण खोने की आशंका, मोदी-शाह की शैली से नाराज़ संघ को यूपी भी हाथ से निकलता दिख रहा है

आम चुनावों के छह चरण के मतदान पूर्ण हो चुके है और जल्द ही अंतिम चरण का मतदान होने वाला है. लेकिन छह चरण के बाद भी बीजेपी की सत्ता में वापसी की तस्वीर साफ होती नजर नहीं आ रही है. जिसे लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) काफी चिंतित है. छठें चरण तक आते-आते केंद्र के साथ-साथ 2022 में यूपी की सत्ता खो देने का डर भी संघ में हैं.

संघ इस बात को लेकर बेहद चिंता में है कि अगर २३ मई को बीजेपी बहुमत का आकड़ा जुटाने में नाकाम रही तो सत्ता पर नियंत्रण के उसके रोडमैप पर पानी फिर सकता है. अगर बीजेपी केंद्र की सत्ता से बाहर होती है तो 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में भी उसे हार का सामना करना पड़ेगा.

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वहीं संघ अति राष्ट्रवाद, धार्मिक और जातीय ध्रुवीकरण और सांप्रदायिक विभाजन जैसे सारे फार्मूले अपनाने के बावजूद जमीनी स्तर पर बीजेपी सरकार बनने के संकेत नहीं मिलने के चलते चिंतित है. दरअसल बीजेपी लगातार सरकार बनाने के दावे कर रही है लेकिन इससे अलग आरएसएस का आंकलन कुछ और ही कहता है.

संघ ने स्वीकार किया है कि उन्हें यूपी में समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी के महागठबंधन से और कई सीटों पर कांग्रेस से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. जिसके चलते बीजेपी की नाव बीच में फंसी गई है वहीं इस हार के दूरगामी असर 2022 के विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिलेगें.

वहीं दक्षिण व पूर्वोत्तर भारत से मिल रहे जमीनी रुझानों को देखते हुए आरएसएस को यह भी साफ नजर आ रहा है कि यूपी में होने वाले नुकसान की भरपाई यहां से होने की संभावनाएं भी बहुत कम हैं. वहीं पिछले साल राजस्थान, एमपी और छत्तीसगढ़ में मिली हार ने भी आरएसएस की चिंता बढ़ाई हैं.

वहीं आरएसएस के एक उच्च पदस्थ सूत्र के अनुसार पिछले कुछ समय से बीजेपी और आरएसएस में कई मुद्दों को लेकर एक राय नहीं है. इसी का कारण है कि आरएसएस इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी का साथ खुलकर देता हुआ नजर नहीं आ रहा है. दरअसल मोदी-शाह की आक्रमक शैली संघ के साथ तालमेल नहीं बैठा पा रही हैं.