सीएए की पहली बरसी पर पूर्वोत्तर के कई राज्यों में फिर शुरू हुआ सीएए के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

आपको बता दें अगले साल 2021 के मार्च-अप्रैल में असम में विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले आसू ने सीएए के खिलाफ अभियान की शुरुआत की है.

हाल ही में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल जो चिंगारी छोड़ी थी, वो अब आ’ग बनकर धधकने लगी है. दरअसल, बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने पिछले दिनों एलान किया था कि जल्द ही पूर्वोत्तर के राज्यों में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू कर दिया जायेगा. इसके नियम बनाने का काम चल रहा है. कैलाश विजयवर्गीय के इस एलान के बाद पूर्वोत्तर के राज्यों में एक बार फिर से संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ आंदोलन शुरू हो चुका है।

असम सहित पूर्वोत्तर के कई राज्यों में सीएए के खिलाफ शुक्रवार को फिर से आंदोलन शुरू हो गया है। आपको बता दें पिछले साल कोरोना महामा’री के चलते नागरिकता कानून के खिलाफ देश भर में चल रहा आंदोलन थम गया था. आंदोलनकारियों ने महामा’री के चलते इस आंदोलन को अस्थाई रुप से स्थगित कर दिया था. लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों में एक बार फिर से विरोधी शुरू हो गया है।

अगले साल मार्च-अप्रैल में असम में विधानसभा चुनाव होने हैं.

संशोधित नागरिकता कानून के आंदोलन का एक साल पूरा होने के बाद शुक्रवार को अखिल असम छात्र संघ (AASU) उत्तर पूर्व छात्र संगठन (NESO) कृषक मुक्ति संग्राम समिति (KSU) और असम जाती’यतावा’दी युवा छात्र परिषद (अजायुछाप) सहित कई संगठनों की अगुवाई में इस विवा’दास्प’द कानून के खिलाफ शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन हुआ और इसे निरस्त करने की मांग की गई।

CAA

वही छात्र संगठनों ने केएमएसएस के नेता अखिल गोगोई की रिहाई की भी मांग की है, जिन्हें पिछले साल सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था. अखिल गोगोई तब से जेल में बंद हैं।

सीएए के खिलाफ असम में कृषक मुक्ति संग्राम समिति, ऑल असम स्टूडेंट यूनियन (आसू), असम जातीयतावादी युवा छात्र परिषद, लाचित सेना समेत कई संगठनों ने रैलियां निकाली. विरोध प्रदर्शन शिवसागर से शुरू हुआ था।

गौरतलब है की, पिछले साल भी सीएए विरोधी आंदोलन यहीं से शुरू हुआ था. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सीएए राज्य के मूल निवासियों की पहचान भाषा और सांस्कृ’ति’क धरोहर के खिलाफ है. उन्होंने कानून को वापस लेने की मांग की है।