मेरा नाम अर्नब है, तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते- अन्वय नाइक की बेटी अदन्या नाइक

मुंबई/महाराष्ट्र: बीते 4 नवंबर 2020 की सुबह महाराष्ट्र पुलिस ने Republic TV के एडिटर इन चीफ ‘अर्नब गोस्वामी’ को साल 2018 में महाराष्ट्र में 2 माँ-बेटों को आ’त्मह#त्या के लिए मजबूर करने के मामले में गिरफ़्तार किया गया था. जिस के तुरंत बाद से ही देश की सत्ताधारी पार्टी समेत सोशल मीडिया पर उसके सपोर्ट में “अभिव्यक्ति की आजादी” के नाम मुहिम चलायी गयी थी.

जिस अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर जो सोशल मीडिया के लोग और शीर्ष पार्टी के नेता मुहिम चलाये हुए थे, उनको अब से पहले कभी किसी पत्रकार के लिए ऐसी “अभिव्यक्ति की आजादी” को दबाने को लेकर ध्यान नहीं गया. ट्विटर से लेकर फेसबुक तक काफी लोग इस आरो’पी अर्नब गोस्वामी का बचाव करने में लगे हैं.

Arnab Goswami bailed in this case

क्या अर्नब गोस्वामी को इस मामले में ज़मानत मिल सकेगी?

हालांकि यह बात अलग है कि उसका खुद का चैनल रिपब्लिक टीवी और उनकी हिंदी न्यूज़ वेबसाइटों के जरिए उसके सपोर्ट में कुछ तो भी लिखकर खबरें चला रहा है. जैसे कि देशभर के 130 करोड़ लोग अर्नब के साथ हैं, क्या ये अर्नब के रिश्तेदार हैं या उसके सगे वाले?.

चैनल पर देश भर के अलग-अलग हिस्सों से उसका समर्थन करते हुए लोगों को दिखाया जा रहा है, लेकिन ये उस परिवार या ऐसे लोगों को दिखाने से बच रहे हैं, जो लोग चाहते हैं कि महाराष्ट्र का वो इंटीरियर डिजाइनर ‘अन्वय नायक’ और उसकी मां ‘कुमुद नायक’ को इंसाफ मिले.

आपको बता दें की अर्नब गोस्वामी साल 2018 में इन दो माँ-बेटे को आ’त्मह#त्या के लिए मजबूर करने के मामले में इस केस में गिरफ़्तार किया गया है.

इंटीरियर डिजाइनर की बेटी ‘अदन्या नाइक’

एक झूठ को छुपाने के लिए आपको दस हजार झूठ बोलने पड़ते हैं. सिर्फ इसलिए कि आप चीख लेते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि आप सच कह रहे हैं. जो हमारे साथ हुआ है वह सच है. मेरे पिता ने खुद सुसाइड नोट लिखा था. इसमें कोई शक नहीं है – अदन्या नाइक

खबरों के अनुसार इंटीरियर डिजाइनर ‘अन्वय नायक’ की आ’त्मह#त्या के बाद जो सुसाइ’ड नोट मिला था उसमें उसने ‘अर्नब गोस्वामी’ समेत दो अन्य लोगों पर उसके काम का बकाया भुगतान न करने का आरो’प लगाया था, जिसके चलते वह आर्थिक तं’गी से जूझ रहा था और उसे कई लोगों पैसा भी देना था जिन लोगों ने उसके यहां काम किया था.

Interview of Daughter of interior designer 'Anvay Nayak'

कारवां मैगज़ीन को दिए अपने एक इंटरव्यू में इंटीरियर डिजाइनर की बेटी ‘अदन्या नाइक’ ने बताया कि जब उसके पिता इसके इंटीरियर डिजाइन के काम को कर रहे थे इसने तभी से पैसा न देने का मन बना लिया था, क्योंकि वह बीच-बीच में कई बार काम को नापसं’द करता और किये कराये उस काम को वो फिरसे दुबारा करवाता था, जो कि पहले से ही तय हो चुका था कि कहां पर क्या करना है, किस जगह पर कौन सी चीज लगेगी.

इसके बावजूद भी उनके पिता ने वह सारा काम किया जो-जो इन लोगों ने बदलाव बताए, लेकिन दिक्कत वहां है कि जब आप किसी काम को कर चुके होते हैं और फिर दुबारा उसमें बदलाव करना होता है, तो अलग से खर्चे भी होते हैं जो वह न देने का पूरी तरह मन बना चुका था.

‘अन्वय नायक’ को इस वजह से ‘अर्नब गोस्वामी’ नहीं दे रहा था पैसा

इसी के चलते वह बार-बार किसी न किसी काम में कमी निकालता उस काम को दोबारा से मॉडिफाई करने के लिए कहता. साल 2016 से यह प्रोजेक्ट चल रहा था और पैसे मांगने पर वह धमकि’यां देने पर उतारू हो जाता इस संबंध में मैंने कई बार घर पर भी पापा से बात की कि हमें पुलिस के सामने इसकी शिकायत दर्ज करना चाहिए, लेकिन मेरे पिताजी का कहना था कि इस पचड़े में पड़कर मेरा कैरियर बर्बाद हो जाएगा.

मैं उस दौरान इंटर्नशिप कर रही थी, और अपने पापा के साथ भी काम करती थी, और वह नहीं चाहते थे कि मेरे कैरियर पर किसी वजह से कोई दिक्कत आए. अदन्या नाइक बताती हैं कि मेरे पिता जी ने उनके ऑफिस में कई तरह के बदलाव किये, फिर भी अर्नब को उनके काम से कभी संतुष्टि नहीं मिली और पैसा देने के नाम बस बात को टाल दिया जाता था या उन्हें धम’काया जाता था.

मेरे पिताजी उसे बार-बार विनती करते रहते थे कि प्लीज मेरे पैसे दे दीजिए मेरी जिंदगी का सवाल है. उस दौरान उनको वह ईमेल भी भेजे थे कि बात मेरे तक नहीं अब मेरे परिवार तक चली गई है. हम लोग काफी आर्थिक परेशानियों से गुजर रहे हैं, इसके बाद उन्होंने इस तरह का कदम उठा लिया.

‘अन्वय नायक’ के परिवार ने काफी मुसीबतें झेली हैं

अदन्या नाइक बताती हैं कि पिताजी के ये कदम उठा लेने के बाद जब उनका परिवार पुलिस में FIR कराने गया तो पहले तो वह लोग एफ आई आर दर्ज करने के मूड में ही नहीं थे. उन्होंने देखा कि इसमें ‘अर्नब गोस्वामी’ का नाम आ रहा है तो पुलिस अधिकारी सुरेश वराडे ने मुझे और मेरी मां को ही उल्टी धम’की दे डाली कि देखो आप लोगों की जिंदगी का सवाल है, क्योंकि इस मामले में हाई प्रोफाइल लोग हैं जिन लोगों पर आप इल’ज़ाम लगा रहे हैं.

बीते 2 सालों में उनके परिवार को लगातार धम’कि’यां मिलती रही हैं,जैसे कभी किसी फोन नंबर से या फिर कभी किसी व्हाट्सएप कॉल के जरिए और यह तो बड़ी ताज्जुब की बात है हमें इस साल के मई के महीने तक नहीं पता था कि पुलिस ने कब इस मामले को बंद कर दिया.

लेकिन अब लगता है कि इंसाफ मिलेगा मैं महाराष्ट्र पुलिस से विनती करती हूं कि वे लोग किसी भी तरह के राजनीतिक दबा’व में न आकार वह निष्पक्ष रूप से इस मामले में जांच करें और हमें न्याय दिलाएं.