प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रवीश कुमार को इंटरव्यू देने से आखिर इतना डरते क्यों हैं?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रवीश कुमार को इंटरव्यू देने से आखिर इतना डरते क्यों हैं?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंटरव्यू का एक पुराना और प्रसिद्ध वीडियो आपने देखा ही होगा, इसमें पत्रकार करण थापर नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू दे रहे हैं. इंटरव्यू के तीन मिनट बाद ही मोदी ने कहा कि मुझे आराम करना है, मुझे पानी दीजिए. इसके दो-तीन सेकंड के बाद ही मोदी अपनी सीट से उठे और ये कहने लगे कि दोस्ती बनी रहे. इसके बाद उन्होंने गले में लगा हुआ माइक्रोफ़ोन निकाल दिया. यह हालत उस राजनेता की थी जो कहते है कि उनका सीना 56 इंच का है.

नरेंद्र मोदी को पानी पीने और बीच इन्टरव्यू से भागने पर विपश करने वाले पत्रकार करण थापर थे. यह वीडियो साल 2007 का है जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे. इसके बाद से ही मोदी इन्टरव्यू देने से परेज करने लगे. पीएम बनने के बाद से ही मोदी सिर्फ अपने पसंदीदा पत्रकार और चैनलों को ही इन्टरव्यू देते है.

सोशल मीडिया पर इन दिनों चर्चा चल रही है आखिर पीएम मोदी एनडीटीवी के पत्रकार और एंकर रवीश कुमार को इंटरव्यू क्यों नहीं देते है? आखिर क्यों वो रवीश के सवालों से इतना ड’रते हैं? इन सवालों को लेकर एंकर रवीश कुमार ने भी अपनी बात सबके सामने रखी थी.

रवीश ने कहा कि हो सकता है कि पीएम मोदी मेरे सवालों से घबराते है, इसलिए वो मुझे इंटरव्यू नहीं देते है. एक चैनल से बात करते हुए रवीश कुमार ने कहा कि जब पीएम मोदी मेरे सामने होगें तो मैं उनका प्रवचन तो नहीं सुनूंगा. मैं यह नहीं सुनूंगा कि पकौड़ा कहाँ पर बनता है और कहाँ पर 200 रूपये में बिकता है.

रवीश ने कहा कि मैं सीधे काउंटर सवाल करूंगा क्योंकि यही मेरी फितरत है. अब ये सवाल करना उनका अनादर करना नहीं है बल्कि ये तो देश की जनता का सम्मान ही है कि जिन्हें चुनकर भेजा गया है उनसे सवाल किये गए.

रवीश कुमार ने आगे कहा कि मोदी जी देश के प्रधानमंत्री हैं, जब सत्ता उनके हाथों में है तो जवाबदेही भी उनकी ही बनती है. इस वक्त एक असंतुलन पैदा हो गया है. असंतुलन यह है कि 99% मीडिया इस समय घुटनों पर है. अगर एक आदमी भी घुटनों पर ना हो तो उन्हें लगता है कि ये मोदी विरोधी है. मैं कहता हूं कि मोदी जी आप रवीश वि’रोधी क्यों हैं?

उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी और मोदी जी ने पिछले दो सालों से मेरे कार्यक्रमों में अपने प्रवक्ताओं को भेजना बंद कर दिया है. तो विरोध कौन कर रहा है..? मैं कर रहा हूं या भाजपा मेरा वि’रोध कर रही है. मैं बीजेपी से पूछना चाहता हूं कि आप मुझ से सच में घृणा करते हैं या फिर आप मेरे सवालों से ड’रते हैं. मुझे लगता है कि शायद आपके पास मेरे सवालों जे जवाब नहीं है. 2014 से पहले तो मुझे फोन करके कार्यक्रम में आने के लिए पूछते थे तो फिर अब क्या हो गया?