VIDEO: 2000 के नोट में नैनो चिप ढूंढने वाली आजतक की एंकर श्वेता सिंह ने बॉलीवुड में भी ढूंढ निकाल यह कनेक्शन

VIDEO: 2000 के नोट में नैनो चिप ढूंढने वाली आजतक की एंकर श्वेता सिंह ने बॉलीवुड में भी ढूंढ निकाल यह कनेक्शन

भारतीय मीडिया इन दिनों बेहद ही गैरजिम्मेदाराना तं’ग से रिपोर्टिंग करने में जुटा हुआ हैं. आपको याद होगा कि जब देश में मुद्रा अवमूल्यन हुआ था तब हमारा मीडिया ने कई अजब-गजब रिपोर्ट दी थी. ऐसी ही एक रिपोर्ट आज तक की जानी-मानी एंकर श्वेता सिंह ने भी दी थी. श्वेता सिंह को सोशल मीडिया पर 2000 के नोट में चिप के अविष्कार के लिए जाना जाता हैं. नोट में चिप की बात कह कर श्वेता सिंह काफी ट्रोल हुई थी.

अब श्वेता सिंह इन बॉलीवुड में एक नया एंजेंडा खोजने की कोशिश कर रही हैं. श्वेता सिंह की शिकायत है कि बॉलीवुड ने दशकों तक सूदखोर बनिया, दुराचारी ठाकुर और पाखंडी ब्राह्मण जैसे नैरेटिव गढ़े है.

अब इसे श्वेता जी की अज्ञानता और जातिवादी मानसिकता ही कहा जा सकता हैं कि उन्हें बॉलीवुड में ठाकुरों, ब्राह्मणों और बनियों के साथ हो रही नाइंसाफ़ी तो दिख गई लेकिन यह नहीं दिख पाया कि बॉलीवुड की ज्यादातर फ़िल्मों में हीरो को भी तो इन्हीं समुदायों से बताया जाता हैं.

बॉलीवुड फिल्मों में कभी छोटे ठाकुर, कभी खन्ना साहब, कभी चोपड़ा जी, कभी तिवारी, कभी मेहरा, कभी शर्मा तो कभी बेनर्जी को हीरो के तौर पर दिखाया गया हैं. यानि की अगर विलेन ठाकुर हैं तो हीरो भी ठाकुर.

हालांकि पैरलल सिनेमा की फिल्मों को हम अपवाद के रूप में देख सकते हैं क्योंकि दलित-उ’त्पीड़न जैसे मुद्दों पर आधारित फिल्मों में जाहिर तौर पर दलित रहेगा ही. चाची 420 अपवाद के तौर पर देखी जा सकती हैं. इस फिल्म में हीरो का सरनेम पासवान है या हालिया मसान, जिसका हीरो डोम है.

इसके आलावा बॉलीवुड में हमें ऐसी कोई ज्यादा फ़िल्में देखने को नहीं मिलती जिनमें हीरो कोई दलित या पिछड़ा नज़र आता हैं. आप अपने दिमाग पर जोर देकर याद करें तो भी आपको शायद ही ऐसी कोई फिल्म याद आए जिनमें हीरो का सरनेम यादव, मीणा या महतो जैसा रहा हो.

लेकिन श्वेता सिंह जैसे लोगों को यह नैरेटिव नज़र नहीं आता हैं क्योंकि वो लोग जातिवादी सड़ाँध में सर से पाँव तक डूबे चुके हैं और मीडिया का एक बड़ा हिस्सा ऐसे ही लोगों के कब्जे में हैं.

रविन्द्र चौधरी