नेपाल ने उत्तराखंड के बाद अब बिहार के इलाके में भी ठोका दावा, चल रहे तटबंध निर्माण कार्य को भी रुकवा दिया

भारत और चीन में सीमा विवाद को लेकर बने तनाव के बीच नेपाल ने भी भारत को आंख दिखाना शुरू कर दिया है. नेपाल ने पहले तो उत्तराखंड के तीन भारतीय क्षेत्रों पर अपना दावा ठोका था लेकिन अब इसके बाद नेपाल ने बिहार के पूर्वी चंपारण जिले की जमीन पर भी अपना दावा किया है. सिर्फ दावा ही नहीं किया बल्कि जिले के ढाका ब्लॉक में लाल बकैया नदी पर बनाए जा रहे तटबंध निर्माण का काम भी रुकवा दिया गया है.

न्यूज़ 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार अब इस मामले को लेकर डीएम कपिल अशोक ने जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और बिहार सरकार को इस मामले की जानकारी देते हुए नेपाल से जुड़े इस विवाद को सुलझाने का अनुरोध किया है.

डीएम ने बताया कि नेपाली अधिकारियों को तटबंध के आखिरी हिस्से के निर्माण पर आपत्ति जाहिर की थी जो सीमा के अंतिम बिंदु के पास स्थित है. इस मामले को सुलझाने के लिए नेपाल के रौतहट के अधिकारियों के साथ उन्होंने बातचीत भी की थी लेकिन बात नहीं बन सकी.

आपको बता दें कि नेपाल ने दावा ठोका है कि इस निर्माण का कुछ भाग उसके क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र में आता है. नेपाल के अनुसार यह कथित विवादित स्थान मोतिहारी जिला मुख्यालय से करीबन 45 किमी उत्तर-पश्चिम में अंतराष्ट्रीय बॉर्डर पर है.

हालांकि नेपाल ने यह मुद्दा काफी समय पहले उठाया था लेकिन पूर्वी चंपारण के डीएम ने जब इस मामले को भारत के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) की मांग की तब यह खबर सामने आ सकी.

बता दें कि बिहार के जल संसाधन विभाग ने काफी समय पहले इसका निर्माण कर लिया था लेकिन मानसून से पहले हर साल इसकी मरम्मत की जाती है लेकिन इस बार नेपाली अधिकारियों ने इस पर आपत्ति जाहिर करते हुए उत्तरी छोर पर मरम्मत का कार्य रोक दिया.

सबसे बड़ी बात यह है कि यह पहला मौका है जब इस स्थान को लेकर नेपाल ने अपनी अप्पति जाहिर करते हुए इस क्षेत्र को अपने क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र में होने का दावा किया है. जबकि जब भारत ने इस तटबंध का निर्माण किया था तब नेपाल की तरफ से कोई विरोध नहीं किया गया था.

आपको बता दें कि हाल ही में नेपाल की संसद ने अपना नया विवादित रजनीतिक नक्शे को संसद में पास किया है. इस नक्शे में भारत के उत्तराखंड के लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा पर वह अपना दावा ठोका हैं.

साभार- न्यूज़18