बड़ी खबर: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में आई नई मुसीबत, जमीन पर कब्रिस्तान होने का खुलासा

नई दिल्लीः हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए नए ट्रस्ट के गठन की घोषणा हुई थी की अब अयोध्या के नौ मुस्लिम निवासियों ने मंदिर ट्रस्ट को एक पत्र लिखा है। जिससे राम मंदिर निर्माण में नई मुसीबत आ खड़ी हो गई है। आपको बता दें राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र को लिखे पत्र में इन लोगों ने कहा है कि ध्वस्त बाबरी मस्जिद के पास में कब्रिस्तान था।

मिली जानकारी के अनुसार, अयोध्या के निवासी हाज़ी मोहम्मद सहित 9 लोगों ने पत्र में कहा कि 67 एकड़ जमीन जो केंद्र सरकार ने अयोध्या एक्ट के तहत ली थी और अब उस जमीन को ट्रस्ट को सोप दिया गया है जिसमे 4 से 5 एकड़ जमीन में कब्रिस्तान भी है। पत्र के अनुसार, मस्जिद के आसपास के चार से पांच एकड़ क्षेत्र का उपयोग 1855 के दं’गों में मा’रे गए मुसलमानों को द’फ़नाने के लिए किया गया था।

वही राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि आज की तारीख में भले ही उस जगह कब्र न दिखाई दे, लेकिन वह कब्रिस्तान है। जिसे सन 1949 से लेकर 1992 तक उस जगह का इस्तेमाल होता रहा है। साथ ही पत्र में कहा की आप ‘सनातम’ धर्म के ज्ञाता हैं, आप इस पर विचार करें।

पत्र में कमेटी से कहा गया है कि केंद्र सरकार ने इस पर विचार नहीं किया लेकिन आपसे अनुरोध है कि आप इस पर विचार करें. क्या भगवान राम के मंदिर की नींव किसी कब्रगाह पर रखी जा सकती है क्या?

वही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के सदस्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि उनकी पहली चिंता अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण को लेकर है। कामकाज पूरा करने के बाद बी वह विश्राम लेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि अयोध्या में मंदिर निर्माण के बाद अगर उनका शरीर ने साथ दिया तो वह बाबा काशी विश्वनाथ को मुक्त कराने के लिए दूसरे चरण की कारसेवा का श्रीगणेश करेंगे।

गौरतलब है की यह पत्र ऐसे समय में लिखा गया जब राम मंदिर निर्माण के लिए दिल्ली में बैठक होने जा रही है। मंदिर निर्माण के खाके के साथ जुड़े जगदगुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती सोमवार को श्री रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र की पहली बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली जाने वाले है।

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