VIDEO: नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी ने आर्थिक मंदी समेत कई अन्य मुद्दों पर की चर्चा

देश में आर्थिक मंदी दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश आज रास्ते पर पहुँच चुका है जहां से वापस लौटने की उम्मीद भी अब फीकी पड़ती नज़र आ रही है| देश के बड़े-बड़े नेता और राजनेता ही नहीं बल्कि अब तो विदेशों से भी देश की आर्थिक मंदी को लेकर बयान आ रहे हैं| हर कोई केंद्र सरकार की आलोचना करते और आर्थिक मंदी पर अपनी चिंता ज़ाहिर करते नज़र आ रहा है|

इसी के चलते अभी हाल ही में नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी ने भी आर्थिक मंदी, राष्ट्रवाद, उदारवाद और गरीबी जैसे मुद्दों पर बात कर चिंता जाहिर की है|दरअसल इंडिया टुडे टीवी के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को दिए एक विशेष इंटरव्यू में, नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत विनायक बनर्जी ने आर्थिक मंदी, राष्ट्रवाद, उदारवाद और गरीबी जैसे मुद्दों पर बात कर चिंता जताई है।

बनर्जी ने गरीबी पर चिंता व्यक्त करने के साथ-साथ यह भी कहा कि भारत के गठन के मूल विचारों, राष्ट्रवाद क्या है और आर्थिक प्रगति क्या है, इस क्षेत्र में असहमति होना बहुत महत्वपूर्ण है। बनर्जी ने गरीबी को कम करने की दृष्टिकोण की वजह से नोबेल पुरस्कार के विजेता भी घोषित हुए थे|

बता दें कि यह कोई पहेली बार नहीं है जब उन्होंने देश की गरीबी आर्थिक मंदी पर अपनी चिंता जताई हो इससे पहले भी उन्होंने नोबेल पुरस्कार मिलने से ठीक पहले अभिजीत बनर्जी ने मोदी सरकार को आर्थिक मंदी, बेरोज़गारी, गरीबी को लेकर सलाह दी थी|

जानकारी के मुताबिक़ अभिजीत बनर्जी ने 9 अक्टूबर को अमेरिका के ब्राउन यूनिवर्सिटी में एक सेमिनार के दौरान भारत की आर्थिक मंदी के लिए पुनः केन्द्रीयकरण को जिम्मेदार ठहराया था| उन्होंने मोदी सरकार को सुझाव देते हुए कहा था कि मनरेगा मजदूरी बढ़ाने, सरकारी संस्थानों को मजबूत बनाने, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का हस्तक्षेप बंद करने से आर्थिक स्थिति सुधर सकती है|

साथ ही उन्होंने राजनीति से प्रेरित निर्णयों को वापस लेने की सलाह देते हुए कहा था कि मौजूदा सरकार को लगता है कि सरकार को और अधिक शक्तिशाली होना चाहिए, इसलिए सभी फैसलों का फिर से केन्द्रीयकरण किया जा रहा है| यह संस्थान हैं, लेकिन इनके शीर्ष पदों पर ऐसे लोगों की तैनाती की गई है, जो लापरवाह लोगों पर कार्रवाई नहीं कर सकते|

बनर्जी ने आगे बताया कि सबके लिए पीएमओ से फैसला लेना पड़ता है| असल में आप संस्थाओं को खत्म नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनकी शक्तियों को छीन रहे हैं| वहीँ दूसरी ओर कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार की तारीफ करते हुए अभिजीत बनर्जी ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और सूचना का अधिकार अधिनियम को अहम फैसला बताया था|

जानकारी के लिया बता दें कि अमेरिकी दंपति अभिजीत बनर्जी, एस्तेर डुफ्लो, और माइकल क्रेमर को वैश्विक गरीबी को कम करने के लिए प्रायोगिक दृष्टिकोण के लिए अर्थशास्त्र 2019 में नोबेल पुरस्कार के विजेता के रूप में घोषित किया गया था।

साभारः #AajTak