VIDEO: ‘छपाक’ रिलीज होते ही बढ़ी एसि’ड पी’ड़िताओं की मुश्किलें, योगी सरकार ने थमाया लखनऊ के मशहूर ‘शेरोज हैंगआउट’ को नोटिस

उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ के मशहूर कैफे शेरोज हैंगआउट को खाली करने का नोटिस जारी कर दिया है। यह कैफे एसि’ड पी’ड़ित महिलाओं द्वारा चलाया जा रहा है। सरकार के द्वारा दिये गये नोटिस के बाद डेढ़ दर्जन ए’सिड पी’ड़ित महिलाओं के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इस कैफे के जरिए पी’ड़ित महिलाएं अपनी रोजी-रोटी चलाती थी इसके साथ हीं देश को ये संदेश भी दे रही थी कि ए’सिड पी’ड़ित होने के बावजूद हिम्मत और आत्मसम्मान के साथ जिंदगी कैसे जी सकती है।

आपको बता दें योगी सरकार के द्वार जारी नोटिस में तीन दिन के अंदर कैफे को बंद करने का फरमान सुनाया गया है। सरकार खुद को महिलाओं के लिए कल्याणकारी और हि’तैषी बताती है। जो कि उनके दावों की जमीनी हकी’कत के साथ हीं अ’संवेद’नशी’लता भी नजर आ रही है। हलांकि कोर्ट ने इस मामले में 21 दिन का स्टे लगा दिया है।

इस कैफे में वे लड़कियां काम करती है जो ए’सि’ड अटैक झेलने के बाद समाज ‘की मुख्य धारा से अलग हो चुकी थी।

अब इन लड़कियों को अपने परिवार चलाने की चिं’ता भी सताने लगी है। इस कैफे में आने वाले लोग भी इस बात से दुखी हैं। कई सालों से छांव नामक संस्था एसि’ड अ’टैक पी’ड़िताओं के लिए काम कर रही है. और इसी संस्था को लखनऊ के गोमतीनगर में इस कैफेको चलाने का जिम्मा दिया गया है। छांव संस्था के संचालक आशीष शुक्ला कहते हैं कि सरकार का इरादा सिर्फ इस जमीन को ह’थिया’ना है क्योंकि यह जमीन लखनऊ के सबसे शानदार इलाके में संस्था को दी गई थी।

आशीष के मुताबिक, यह कैफे ए’सिड पी’ड़िताओं के लिए सम्मान के साथ जिंदगी जीने का जरिया था, लेकिन यह जमीन सरकार के आंखों में चु’भ रही थी और यही वजह है कि इसे छी’ना जा रहा है। हमारी संस्था के ऊपर कई तरह के आरोप लगाए गए हैं, लेकिन हमने सरकार से कहा कि जांच करा लीजिए, लेकिन जमीन छी’नना ही उनका मकसद है।

शेरोज़ हैंगआउट, लखनऊ के लोगों का एक पसंदीदा स्थान बन चुका था। जहां लेखक, पत्रकार, कलाकार और रंगकर्मियों समेत लखनऊ आने वाले टूरिस्ट जरूर आते थे। बहरहाल सरकार की तरफ से ये दावा किया गया है कि इस हैं’ग आउट को बंद करने के बाद इन महिलाओं को राष्ट्रीय स्तर का स्किल डे’वलप’मेंट की ट्रेनिंग दी जाएगी।

 

जिससे कि वह बेहतर जिंदगी जी सकेंगी। लेकिन सवाल यह है कि उनसे एक जिंदगी छीनकर दूसरी जिंदगी के सपने सरकार क्यों दिखाना चाहती हैं?

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