85 हजार की नौकरी छोड़कर शुरू की डेयरी फार्मिंग, आज सालाना कमाई 2 करोड़, सैकड़ों युवाओं को दे रहे रोजगार

आज देश का युवा नौकरी के पीछे भाग रहा हैं. बेरोजगारों की संख्या बहुत है लेकिन नौकरियां महज कुछ ही. मौजूदा दौर में ग्रामीण परिवेश के लोग भी कृषि छोड़कर नौकरियों की तलाश में शहरों का रुख कर रहे हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने हजारों की सैलरी वाली नौकरी छोड़कर आर्गेनिक डेयरी फार्मिंग शुरू की और आज वह कई युवाओं को नौकरी दे रहे हैं. उनकी कंपनी का टर्नओवर करोड़ों में हैं.

संतोष शर्मा का जन्म जमशेदपुर में हुआ था, उनके पिता जमशेदपुर के टाटा स्टील कंपनी में काम करते थे. उनकी तीन बहनें हैं और वह सबसे छोटे हैं. संतोष के जन्म के कुछ समय बाद ही उनके पिता रिटायर हो गए. उनके पिता रिटायरमेंट के बाद पुरे परिवार के साथ बिहार के छपरा जिले में स्थित अपने गाँव जाना चाहते थे.

लेकिन उनकी माँ नें बच्चों की अच्छी शिक्षा को ध्यान में रखते हुए जमशेदपुर में ही रहने का फैसला लिया. उनकी माँ को एक दोस्त ने कुछ गायें दी थी जिन्हें पालकर वह अपने बच्चों की पढाई करा रही थी. केनफ़ोलिओज़ से विशेष बातचीत के दौरान संतोष ने कहा कि मैंने बचपन में दूध बेचकर ही पढाई की हैं.

उन्होंने कहा कि तीन बहनों के बाद मैं अकेला लड़का था तो माँ ने मेरी शिक्षा के लिए शहर में रुकने का फैसला किया ताकि हमारी पढ़ाई ख़राब ना हो. उन्होंने मेरा दाखिला एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में कराया. मेरी माँ और दीदी कहती थी कि जब तक मैं फेल नहीं होता तब तक मुझे इंग्लिश स्कूल में पढ़ने दो अगर यह फेल हुआ तो इसे सरकारी स्कूल में डाल देंगे लेकिन मैं कभी फेल नहीं हुआ.

उन्होंने अपनी पढाई खत्म की और ग्रेजुएशन के दौरान कॉस्ट मैनेजमेंट अकॉउंटेंसी की भी पढाई की. इसके बाद उन्हें मारुती के गुड़गांव हेडक्वार्टर में नौकरी मिल गई. संतोष ने कहा कि नौकरी के बाद हमारी स्थिति सुधरने लगी. इसके बाद उन्होंने कई संस्थानों में काम किया.

वो कोटक महेंद्र बैंक में बिहार-झारखण्ड हेड के तौर पर भी कार्यरत रहे. इसी दौरान उनके दोस्तों ने उन्हें अपने आइडियाज पर किताब लिखने के लिए प्रेरित किया. इसी बीच उन्होंने एयर इंडिया ज्वाइन कर लिया यहां उनकी मासिक सैलरी 85,000 रुपए थी. उन्होंने साल 2011 तक यही काम किया.

इसी दौरान उन्होंने दो किताबें नेक्स्ट वॉट इज इन और डिजॉल्व द बॉक्स भी लिखी. जिसमें से डिजॉल्व द बॉक्स काफी चर्चा में रही कई संस्थानों ने इसे अपने सिलेबस में भी शामिल किया. आईआईएम, आईआईटी सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों में संतोष गेस्ट लेक्चरर के रूप में भी पढ़ाने जाते हैं.

संतोष बताते हैं कि एक बार वह देश के पूर्व राष्ट्रपति स्व. डॉ कलाम से मिले थे. श्री कलाम नें उन्हें मिलने के लिए अपने आवास पर बुलाया था और बातचीत के दौरान कहा था कि ऐसा कुछ करना चाहिए जिससे देश के युवाओं की ताकत को हम भारत के विकास में लगा सकें.

इसके बाद से ही संतोष कुछ ऐसा करने का विचार करने लगे. फिर उन्हें आर्गेनिक डेयरी फार्मिंग करने का प्लान बनाया. उन्होंने 2016 में 80 लाख रुपए के निवेश और 8 जानवरों के साथ इसकी शुरुआत की. उन्होंने जमशेदपुर से 35 किमी दूर स्थित नक्सल-प्रभावित क्षेत्र दलमा वन्यजीव अभ्यारण्य में इस फार्म की स्थापना की ताकि वह युवाओं को रोजगार दे सके.

संतोष ने अपनी फार्म का नाम मम्स आर्गेनिक डेरी फार्म रखा. यहाँ पर वह बिलकुल शुद्ध व आर्गेनिक दूध, दही व पनीर का उत्पादन करते हैं. सबसे खास बात यह है कि वो प्लास्टिक के पैकेट के बजाए ग्लास की बोतल में दूध की सप्लाई करते हैं. उनकी फार्म में अभी 100 गायें मौजूद हैं और वह करीब 100 लोगों को रोजगार दे रहे हैं.

उनकी फार्म का टर्नओवर 2 करोड़ के पार पहुंच चूका हैं. संतोष भविष्य में अपनी कंपनी को अन्य शहरों में फ़ैलाने पर काम कर रहे हैं. इसके आलावा वो आर्गेनिक खेती व टूरिज़्म बिज़नेस पर ही फोकस करने का विचार बना रहे हैं.