मुस्लिम समुदाय के खिलाफ़ गुरूद्वारे के मुख्य द्वार पर लिखे गए आप’त्तिजनक शब्द, लोग बोले ये तो खिदमत करने वाली कौम थी

गुना, मुस्लिम समाज के युवा कहते हैं हमने तो सुना था गरुद्वारे में सभी धर्म के लोगों का स्वागत होता है, सिख एक खिदमत करने वाली कौम है, कौन हैं ये लोग जिनको मुसलमानों से इतनी नफरत है

मध्य प्रदेश के गुना ज़िले से एक ख़बर ऐसी है कि शायद ही इस पर कोई यकीन करे. यहाँ शहर के मुख्य गुरूद्वारे के मेन गेट पर गरुद्वारा प्रबंधन कमेटी द्वारा कुछ महीने पहले बैनर रूपी पोस्टर लगाये हैं. इन बैनर पोस्टरों में मुस्लिम समुदाय के लोगों को निशाना बनाते हुए भ’ड़काऊ भाषा में कुछ आपत्तिजनक शब्द लिखे गए हैं, जिसको लेकर शहर के मुस्लिम समाज में रोष व्याप्त है. उन फोटो को आप पोस्ट के आखिर में देख सकते हैं.

इस ख़बर को पूरा बताने से पहले हम आपको कुछ दिन पहले हुई देश की एक चर्चित घट’ना की और ले चलते हैं, फिर हम इस खबर की तह तक जायेंगे. क्यूंकि इस देश की अखंड मज़बूत और इस देश की एकता की पहचान को परीभाषित करने के लिए खुद देश के प्रधानमंत्री ने भी ये शब्द कहे हैं. “विविधता में एकता” हमारे देश की एकता” और इस देश की एकता को तोड़ने वाले ये लोग कौन हैं? किन लोगों से प्रेरित होकर ये लोग अपने समुदाय के लोगों, खासतौर पर युवा पीड़ी को ये एहसास करवाना चाहते हैं कि ये लोग अलग हैं इनसे दूर रहो.

आपको ध्यान होगा कुछ दिन पहले दिल्ली से लगे, उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद के एक गाँव के मंदिर में ‘आसिफ’ नाम का लड़का पानी पीने के लिए गया हुआ था, जहाँ पर कुछ लोगों ने उसको सिर्फ इस वजह से पीटा कि वहां मुसलमानों का आना मना है, इस तरह का बोर्ड लगाया हुआ था. लेकिन वो लड़का अनपढ़ था कहाँ से बोर्ड को पढ़ता, प्यासा था तो पानी पीने के लिए चला गया था.

शरारती तत्वों ने इस विडियो को सोशल मीडिया के ज़रिये वायरल करवा दिया, इसके बाद देश भर के लोगों द्वारा इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी, यहाँ तक के सबसे पहले सिख समुदाय के लोगों ने ये पहल की और लिखा की.

आसिफ बेटा आइंदा कभी प्यास लगे तो गुरुद्वारे चले जाना, वहाँ तुमसे कोई तुम्हारा धर्म और जाति नहीं पूछेगा, वहां लंगर भी खाना और पानी भी पीना.

Anshdeep

देशभर में आपको, हिन्दू-मुस्लिम एकता या मुस्लिम-सिख एकता की हजारों मिसालें देखने को मिल जाएंगी. मुस्लिम समुदाय के युवकों ने भी सिख भाइयों द्वारा आसिफ के लिए किये गए इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर अपनी प्रोफाइल पर खूब शेयर किया.

आपको ध्यान दिला दूं, नीचे दिख रही ये तस्वीर पंजाब के गिदड़बाहा की है, जानते हैं यहाँ जो लड़का अपनी शादी के वक़्त जो सिख पगड़ी पहना हुआ आपको दिख रहा है वह एक मुस्लिम युवक है, जिसका नाम अब्दुल है. इसने अपने निकाह की रस्म की अदायगी सिख पगड़ी को पहन कर की, इतना ही नहीं, इस शादी में उसके कुछ और मुस्लिम दोस्तों ने भी पगड़ी पहनी पता है क्यों?

अब्दुल निकाह के वक़्त सिख पगड़ी में

जब अब्दुल से पूछा गया कि तुमने अपनी शादी में सिख पगड़ी क्यों पहनी तो उसने बताया कि राजधानी दिल्ली में हुए दं’गों के दौरान जो सिखों ने दरियादिली दिखाई और इनके भाईचारे और एकता से प्रेरित होकर मैंने अपनी शादी में सिखों को सामान देने के लिए ये सिख पगड़ी पहनी है.

बता दें, दिल्ली दं’गों के दौरान एक मुस्लिम लड़की की शादी में सिख भाइयों ने सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए, चरों तरफ पहरा दिया था, जिससे की उस वक़्त कोई आसामाजिक शरारती तत्व इस शादी में खलल न डाल सके.

गुना के गुरुद्वारे पर लिखे गए मुस्लिम विरोधी पोस्टर

चलिए अब बात करते हैं मध्य प्रदेश के गुना जिले की ख़बर की, शहर के सिख समाज के इस गरुद्वारे के मुख्य द्वार लगे हुए इन बैनरों के इस मामले में मुस्लिम समाज के अध्यक्ष शफीक कुरैशी ने फ़रवरी महीन में प्रशासन को ज्ञापन देकर इन बैनरों को हटवाने के लिए गुहार लगायी थी लेकिन कहीं से भी इस मामले में अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है.

Guna Grudwara Viral Photo

मुस्लिम समाज के अध्यक्ष शफीक कुरैशी से बात की तो उन्होंने कहा कि इस तरह के आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल दो समुदायों के बीच खायी पैदा करने जैसा काम कर रहा है. यह शब्द समाज के युवाओं को नफरती भाषा में सन्देश देने का काम कर रहे हैं.

हाल ही में, मुजाहिद भारतीय नाम के एक युवक ने सोशल मीडिया के ज़रिये भी सिख समुदाय पर सवाल उठाये हैं, जिनके शब्द कुछ इस प्रकार हैं.

क्या प्यासे #आसिफ़ से गुरुद्वारा साहिब में कोई धर्म नही पूछेगा….❓ मेरे गृह जिले गुना स्थित प्रमुख गुरुद्वारे में चस्पा इस्लाम विरोधी लेखों पर आधारित…. विगत दिनों गाजियाबाद में आसिफ नामक एक 13 वर्षीय मुस्लिम बालक के साथ पानी पीने का लेकर की गई मारपीट की वीडियो वायरल होने के बाद लगातार सोशल मीडिया पर देखने व पढ़ने को मिला, कि बेटा आगे से कभी प्यास लगे तो गुरुद्वारे में चले जाना वहां पर कोई धर्म नहीं पूछेगा, बेशक इस बात में कोई दो राय नहीं है कि सिख समुदाय द्वारा देश व दुनिया भर में गुरुद्वारों में आम जनों के लिए लंगर चलाया जाता है, जिसका लाभ बड़ी संख्या में सभी धर्मों के लोग लेते हैं, लेकिन यहां शहर गुना के गुरुद्वारे मैं शायद ऐसा कुछ नहीं है, गुना शहर के गुरुद्वारे में जब आप प्रवेश करेंगे, तो प्रवेश द्वार पर ही सार्वजनिक रूप से कुछ पोस्टर यहां पर चस्पा किए गए हैं जिनमें कई इस्लाम विरोधी बातों को दर्शाया गया है, और इन पोस्टरों के पढ़ने के बाद साफ तौर पर यह प्रतीत होता है कि सिख समुदाय भी अब इस्लामोफोबिया से ग्रस्त हो चुका है, यदि यह किसी एक एक सिख भाई के व्यक्तिगत विचार होते तो शायद मेरा यह लेख आप नहीं पढ़ रहे होते, परंतु एक धार्मिक स्थल व गुना शहर के प्रमुख गुरुद्वारे के प्रवेश द्वार पर इस तरह के लेख होना कहीं ना कहीं सिख समुदाय के इस्लामोफोबिया के शिकार होने को साफ तौर पर दर्शाता है, ऐसे में यदि आसिफ यहां भी पानी पीने पहुंचे तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि गाजियाबाद की घटना यहां भी दोहराई जाएगी….!! मुजाहिद भारतीय

मुजाहिद की इस पोस्ट पर एक फेसबुक यूज़र ‘दानिश खान’ कमेंट बॉक्स में लिखते हैं, निशब्द मुल्क में एक ऐसा जह’र घोल दिया गया है जिसका असर अभी कम और आने वाले वक्त में बहुत ज्यादा देखने को मिलेगा.

चारो तरफ सिर्फ अंधेरा नजर आता है
बस चिराग रोशन करने वाले कहाँ गुम है
कोई गरीबी तो कोई अंधभक्ति में मग्न है

दिल्ली (नोएडा) के रहने वाले ज़ुबैर शैख़, पिछले 10 वर्षों से भारतीय राजनीती पर स्वतंत्र पत्रकार और लेखक के तौर पर कई न्यूज़ पोर्टल और दैनिक अख़बारों के लिए कार्य करते हैं।