#देश_विक्रेता: क्‍या अब निजीकरण के खिलाफ़ गाना गाने पर इस देश में जा’न जा सकती है?

प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने शिखर वार्ता के ठीक पहले जापान के टोक्‍यो में व्यापारिक संगठनों को संबोधित किया था. जहां प्रधानमंत्री ने भारत की विकास दर में आए उछाल और उस वक्त एफडीआई पर लिए गए फैसलों का जिक्र करते हुए जापानी निवेशकों को भारत में अनुकूल माहौल मुहैया कराने के संकेत दिए।

टोक्यो में व्‍यापारिक सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था की मैं गुजराती हूँ और गुजरती होने के नाते मेरे खू’न में कारोबार है और वह शासन और व्यापारियों के बीच बेहतर तालमेल समझते हैं, आपको बता दें भारत और जापान बिजनेस को-ऑपरेशन कमेटी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मोदी ने हिंदी में भाषण दिया था।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था की ”मैं गुजराती हूँ और गुजरती होने के नाते मेरे खू’न में कारोबार है” आज उसी बात को छह साल से ज्यादा का समय बीत चूका है और इसी को लेकर उत्‍तर प्रदेश के शहीदी जिले ग़ाज़ीपुर के एक दलि’त दम्‍प’त्ति ने उसी तर्ज पर एक गीत गा दिया तो उनकी जा’न को लाले पड़ गए, दरअसल, भीम गीत गाने वाले बहुजन कार्यकर्ता सपना बौद्ध और विशाल ग़ाज़ीपुरी दो हफ्ते से अपनी जा’न बचाते फिर रहे हैं।

 

शुक्रवार रात से देश बिक्रेता के नाम से एक हैशटैग अचानक से ट्विटर पर ट्रैंड करने लगा, यह हैशटैग सपना और विशाल को मिली धम’कि’यों के खिलाफ देश भर के बहुजनों का एक प्रतिरो#ध था, इस हैशटैग के शब्‍द वही हैं, जो गीत इस दम्‍प’त्ति ने गाया है, गीत इस प्रकार था. ‘आया देश बिक्रेता’ ज़ाहिर है, इसमें प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सार्वजनिक इकाइयों और सम्‍पत्तियों को बेचने की चर्चा है।

आपको बता दें यह गीत रिलीज होते ही यू्ट्यूब पर वायरल हो गया, जिसे लाखों बार देखा गया, और इस गीत के वायरल होने के तुरंत बाद सपना और विशाल को धम’की भरे फोन आने लगे, इसके बाद उनका ग़ाज़ीपुर स्थित जय भीम स्‍टूडियो ज#ला दिया गया। और दोनों को ज’ला देने की धम’की मिलने लगी।

मामला बढ़ता देख विशाल और सपना ने स्‍थानीय भीम आर्मी कार्यकर्ताओं के सहयोग से किसी तरह नोनहरा थाने में तहरीर दर्ज कराई, वही भीम आर्मी कार्यकर्ताओं के सहयोग से बहुजन समाज पार्टी से लेकर भीम आर्मी तक और तमाम दलित संगठनों की ओर से इस दम्‍पत्ति को समर्थन मिला है।

वही इस मामले पर उत्‍तर प्रदेश पुलिस ने अब तक धम’की देने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है, इस हैशटैग का असर यह हुआ कि देश भर से निजीकरण से प्रताडि़त लोग इसमें अपनी अपनी समस्‍याएं लेकर आधी रात शामिल हो गए।