5 रुपये का पैकेट बेच विदेशी ब्रांड के छुड़ाए पसीने, बनाया 850 करोड़ का कारोबार

भारत में नमकीन का कारोबार अब तक करीबन 35,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच चूका हैं. नमकीन बनाने के इस व्यवसाय में कई बड़ी कंपनियों की मौजूदगी है लेकिन इन बड़ी कंपनियों को कड़ी टक्कर देश की छोटी नमकीन कंपनियां दे रही हैं. मौजूदा दौर में वोकल से लोकल के अभियान के बाद इस व्यवसाय में लोकल नमकीन की मांग बढ़ने की आस लगाई जा रही हैं. भारत में नमकीन के क्षेत्र में कई विदेशी कंपनियां मौजूद है.

लेकिन इन विदेशी कंपनियों के सामने कई घरेलू ब्रांड है जो अपनी स्वाद से लोगों का दिल जीत रहे है. इतना ही नहीं कुछ ब्रांड आज के दौर में बहुत बड़े हो चुके है और उनका टर्नओवर भी करोड़ो में पहुंच चूका हैं. ऐसे ही एक क्षेत्रीय नमकीन ब्रांड के बारे में आज हम बात करने जा रहे हैं. एक छोटी सी उम्मीद के साथ शुरू हुए इस ब्रांड के सफलता के नए आयाम हासिल किया हैं.

हैरानी की बात यह है कि इस ब्रांड को नाम से जानने वालों की तादात ज्यादा नहीं होगी लेकिन आज कंपनी का सालाना टर्नओवर 850 करोड़ रुपये को पार कर गया हैं. हम बात कर रहे है इंदौर स्थित स्नैक फूड कंपनी प्रताप नमकीन की. इस कंपनी का नमकीन आज पुरे देश में पहुंचता हैं.

कंपनी ने अपने व्यवसाय की शुरुआत नमकीन के छल्ले बनाने के साथ की थी तब उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि एक दिन वह इस क्षेत्र के अग्रणी कंपनियों में से एक होंगे. कंपनी की शुरुआत साल 2003 में अमित कुमात और अपूर्व कुमात ने अपने दोस्त अरविंद मेहता के साथ की थी और आज देशभर में चार कारखानों के साथ 24 राज्यों में 168 स्टोर हाउस और 2,900 वितरकों मौजूद हैं.

अमित ने एक स्नैक्स कंपनी में 10 साल काम करने के बाद खुद का कारोबार शुरू करने का मन बनाया और 2001 में उन्होंने रसायन विनिर्माण क्षेत्र में कारोबार शुरू किया. लेकिन कंपनी को एक साल के अंदर ही 6 करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ गया और उन्हें अपने इस करोबार को बंद करना पड़ा. शुरूआती असफलता ने उन्हें गहरा अघात पहुंचाया. इसके साथ ही उन्होंने अपनी सारी बचत और इंदौर क्षेत्र के अपने साथी व्यापारियों के बीच सम्मान भी खो दिया.

अमित ने रिश्तेदारों और दोस्तों से उधार लेकर सारे लेनदारों का बकाया चूका दिया लेकिन उनका खुद का बिजनेस एम्पायर बनाने का सपना इतनी आसानी से कहां छुड़ने वाला था. अमित ने साल 2002 में नमकीन का व्यवसाय शुरू करने की योजना बनाई. उन्होंने अपना यह आइडिया अपने भाई अपूर्व और मित्र अरविंद से साझा किया.

इसके बाद तीनों ने अपने परिवार वालों को बड़ी मुश्किलों से मनाया और 15 लाख रुपये इकट्ठा कर प्रताप स्नैक्स नाम से अपने सपने को साकार करने की नींव रख दी. अमित कहते है कि मैं हमेसा से एक बिजनेसमैन बनाना चाहता था और स्नैक्स बाजार में मुझे काफी दिलचस्पी थी क्योंकि मैं इस मार्केट में सभी बड़े ब्रांडों से परिचित था. मुझे लगा कि इंदौर जैसे शहरों में उनकी पहुंच बड़ी नहीं थी और इसीलिए ही मैंने इस क्षेत्र को चुना.

अमित ने शुरू में दुसरे कंपनी के स्नैक्स का वितरण शुरू किया और काफी समय के बाद एक बड़ी पूंजी जुटाई. इसके बाद कंपनी ने खुद का विनिर्माण संयंत्र स्थापित किया और फिर प्रताप स्नैक्स ने साल 2011 में येलो डायमंड नाम से एक रिंग स्नैक्स मार्केट में पेश किया.

इसने कंपनी का टर्नओवर 150 करोड़ पहुंचा दिया. आज कंपनी का टर्नओवर एक हजार करोड़ के आसपास है और स्नैक्स मार्केट में उसकी हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी हैं. प्रताप स्नैक्स की सफलता दिखाती है कि एक छोटे से शहर से निकल कर कैसे युवा अपने सपने साकार करते है और घरेलू ब्रांड से मल्टीनेशनल कंपनियों को कांटे की टक्कर देते हैं.