VIDEO: राम मंदिर शिलान्यास, पीएम मोदी के भाषण में चौंकाने वाले कई पहलू थे

5 अगस्त को अयोध्या में राम जन्मभूमि पर राम मंदिर की नींव रखने का कार्य पीएम मोदी के हाथों से संपन्न हो चूका है. इसी के साथ पीएम मोदी अकेले ही मंदिर निर्माण का श्रेय लेने में कामयाब हो गए. जिस मंदिर आन्दोलन में मोदी का कोई खास योगदान नहीं रहा उसे मोदी ने पूरी तरह से अपने नाम कर लिया. पूजा स्थल पर उपस्थित अन्य लोग सिर्फ मूकदर्शक बने हुए थे.

इस उत्सव ने धर्म और शासन के बीच का फर्क पूरी तरह से ख’त्म कर दिया. पीएम मोदी ने राम मंदिर आंदोलन के वेटरन के रूप में नहीं बल्कि एक प्रधानमंत्री के रूप में पूजा अर्चना की थी.

भूमि पूजन के बाद मोदी ने करीब 35 मिनट का लंबा भाषण भी दिया जो चरित्र में बहुस्तरीय था. पीएम मोदी के भाषण में कई चौंकाने वाले पहलू भी सामने आए. भाषण के कई अंशों में उनके शब्द मंदिर आन्दोलन के उग्र दिनों में हुई घटनाओं के बिल्कुल उलट थे.

प्रधानमंत्री ने दावा किया कि जब सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला दिया तो हिन्दुओं द्वारा इसका उत्सव नहीं मनाया गया और ऐसा करके उन्होंने साबित किया कि बहुसंख्यक समुदाय कटु’ता को पीछे छोड़ कर सामूहिक भविष्य बनाने को उत्सुक है. लेकिन इसमें कोई श’क नहीं है कि यह बात इसपर निर्भर करती है कि सारे लोग भगवान राम को भारतीय राष्ट्रीय चरित्र के रूप में ‘स्वीकार’ करें.

पीएम मोदी ने प्रलयकाल की बाइबिल की कल्पना का उपयोग करते हुए कहा कि इस जगह का इतिहास वि’ध्वंस और पुनर्निर्माण का है, टूटना और फिर उठके खड़ा होना. लेकिन वह अतीत था और अब वक्त आ गया है एक भव्य मंदिर के निर्माण कार्य को करने का.

 

इस दौरान मोदी ने मुक्ति, त्याग-बलिदान जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए लगातार याद दिलाया कि मंदिर स्थल का अतीत में विरोध हुआ जो नेता ध्रुवी’करण की अपनी छवि से दूर जाना चाह रहा हो वो शायद ही इस तरह की रणनीति बनाए.

ध्यान देने वाली बात यह भी है कि मोदी ने दर्शकों से जय श्री राम का नारा नहीं लगवाया, बल्कि वो प्राचीन काल से चले आ रहे जय सिया राम के नारे पर चले गए. अब इस पर घमासान छिड़ा है कि क्या मोदी अपने लोगों को इशारा कर रहे थे कि वो अपनी आवाज़ और अंदाज बदल लेन?

अगर ऐसा है भी तो यह काफी मुश्किल होगा क्योंकि पुरानी आदतें इतना जल्दी नहीं बदलती हैं. अब टकराव के आदी रहे सीएम योगी को ही ले लीजिए. मोदी ने बदलाव के लिए कई रामायणों की चर्चा की, जो भारतीय भाषाओं में हैं और विदेशों में भी है.

उन्होंने संदेश दिया कि भारतीय मुसलमान भी राम का अनुसरण शुरू करें क्योंकि इंडोनेशियाई भी उनका बहुत आदर किया जाता है. हमेशा अपनी राजनीति और नीतियों को राम परंपरा से जोड़ने का मौका ढूढने वाले मोदी ने यह बात खुलकर कही कि भगवान राम सामाजिक समरसता और गरीबों का ख्याल रखने से लेकर सबके साथ सहानुभूति के लिए प्रतिबद्ध थे.

साभार- Thoughtofnation